नगालैंड के ओटिंग गांव में उग्रवादियों के खिलाफ अभियान में 14 नागरिकों की मौत का जिक्र करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा, आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया। यही नहीं गृहमंत्रालय व मामले की जांच करने वाली एसआईटी से रिपोर्ट भी तलब की गई थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने शुक्रवार को कहा, ऐसी सामान्य धारणा कायम करना गलत है कि पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में अफ्स्पा के कारण मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। आयोग इस कानून की वैधता या सांविधानिकता की जांच नहीं कर सकता और न ही इस पर बहस करा सकता है। इस कानून को लागू रखने या हटाने पर फैसला पूरी तरह से सरकार को करना है और उसे इसकी जरूरत की समीक्षा करते रहना चाहिए।
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जस्टिस मिश्रा ने हालांकि जोर देकर कहा कि आयोग हिरासत में होने वाली मौतों या गैर-न्यायिक हत्याओं को बहुत गंभीरता से देखता है। इस तरह के सभी मामलों की रिपोर्ट की जानी चाहिए या फिर स्वत: संज्ञान लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, आयोग सिर्फ मेरिट के आधार पर मामलों की जांच करता है और पीड़ित के परिवारों के लिए मुआवजे का एलान करता है, जिसे राज्य सरकारें लागू करती हैं।
नगालैंड के ओटिंग गांव में उग्रवादियों के खिलाफ अभियान में 14 नागरिकों की मौत का जिक्र करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा, आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया। यही नहीं गृहमंत्रालय व मामले की जांच करने वाली एसआईटी से रिपोर्ट भी तलब की गई थी।