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राकेश टिकैत कहते हैं, अभी पहलवानों के पास कई विकल्प हैं। इस बाबत भी विचार किया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय पहलवानों के मेडल, क्यों न राष्ट्रपति को सौंप दिए जाएं। जब सरकार को पहलवानों के मेडल के सम्मान की कोई परवाह ही नहीं है, तो उन्हें राष्ट्रपति को सौंपना ही उचित है। अगर इस पर सहमति नहीं बनती है, तो मेडल की वैश्विक स्तर पर बोली लगाई जा सकती है। इस तरह की बोली में तो कई देश भाग लेंगे। इससे तो अपने देश का मान-सम्मान बढ़ जाएगा। हालांकि ये दोनों बातें अभी एक विकल्प के तौर पर हैं। आगे क्या करना है, क्या नहीं, ये खाप पंचायत ही तय करेगी।