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Wrestlers Protest: कुश्ती के अखाड़े में गोल्ड जीतने वाले पहलवानों के लिए राजनीतिक दंगल में पार पाने की चुनौती

सार

Wrestlers Protest: पहलवान सोमवीर ने इस संबंध में अमर उजाला डॉट कॉम से कहा, कुश्ती फेडरेशन पर जो आरोप लगे हैं, उनमें कुछ तो सच्चाई है। भ्रष्टाचार के मामले तो पहले से ही आते रहे हैं। ये अलग बात है कि खिलाड़ियों ने अपने भविष्य को देखते हुए इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया...
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Wrestlers Protest: भारतीय कुश्ती संघ के खिलाफ धरने पर बैठे पहलवान - फोटो : Agency
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विस्तार
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कुश्ती में भारत का नाम दुनिया में चमकाने वाले पहलवानों को अपने ही फेडरेशन के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन (Wrestlers Protest) करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति क्यों बनी है कि कुश्ती के अखाड़े में 'गोल्ड' जीतने वाले पहलवानों के सामने अब जबरन राजनीतिक 'दंगल' में पार पाने की चुनौती रख दी गई है। बुधवार को जंतर-मंतर पर कुश्ती खिलाड़ियों ने 'भारतीय कुश्ती फेडरेशन' पर गंभीर आरोप लगाए थे। गुरुवार को भी बैठक और भरोसा देने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। नतीजा, खिलाड़ियों ने अपना धरना-प्रदर्शन उठाने से मना कर दिया। जंतर-मंतर पर पहुंचे खिलाड़ियों और कोच, से हुई बातचीत के आधार पर इस विवाद के कई पहलू सामने आए। उसमें फेडरेशन की मनमर्जी, महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण, भ्रष्टाचार और सुविधाओं को लेकर भेदभाव, जैसी कई बातें देखने को मिली हैं।

अब खिलाड़ियों के लिए चुप रहना नहीं बनता था

पहलवान सोमवीर ने इस संबंध में अमर उजाला डॉट कॉम से कहा, कुश्ती फेडरेशन पर जो आरोप लगे हैं, उनमें कुछ तो सच्चाई है। भ्रष्टाचार के मामले तो पहले से ही आते रहे हैं। ये अलग बात है कि खिलाड़ियों ने अपने भविष्य को देखते हुए इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया। जब महिला खिलाड़ियों के साथ यौन शोषण जैसा मामला सामने आए, तो अब खिलाड़ियों के लिए चुप रहना नहीं बनता था। विनेश फोगाट ने जो कुछ कहा है, उसमें सच्चाई है। फेडरेशन के अध्यक्ष की सहमति के बिना किसी कोच की हिम्मत नहीं हो सकती कि वह महिला खिलाड़ी के साथ कुछ गलत करे। फेडरेशन के अध्यक्ष को हटाकर, सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। यहां तो उल्टा हो रहा है। अध्यक्ष बृज भूषण सिंह कह रहे हैं कि जो खिलाड़ी जंतर मंतर पर पहुंचे हैं, वे तो महज तीन फीसदी हैं। इसका कहने का क्या मतलब है। क्या वे चाहते हैं कि पहलवान यहां आकर शक्ति प्रदर्शन करें। पहलवानों को जबरन राजनीतिक दंगल का हिस्सा बनने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

पहलवानों को डराया जा रहा है, करियर बर्बाद हो जाएगा

अर्जुन अवार्डी सोमवीर के साथ ही पहलवान अमित, रवि और साक्षी मलिक ने कहा, पहलवानों को डराया जा रहा है कि वे जंतर मंतर पर न आएं। जो युवा पहलवान हैं, उन्हें कहा गया है कि वे दिल्ली जाने से पहले आगे के करियर को जरुर देख लें। उनकी चयन प्रक्रिया जंतर मंतर पर नहीं होगी। खिलाड़ियों के कैंप में बहुत सी अनियमित्तताएं होती हैं। किस संगठन से कितना पैसा आया है, उसमें से खिलाड़ियों पर कितना खर्च हुआ है, इसमें बहुत बड़ा घालमेल हुआ है। पैसे का बड़ा कट लगता है। कैंप में महिला पहलवानों को गाली दी जाती है। अगर किसी कारणवश कोई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, नेशनल टूर्नामेंट नहीं खेलता है, तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। जो चयनकर्ता या कोच है, उसे यह अंदाजा नहीं होता है कि कोई चोट ठीक होने में कितना समय लेती है। कई बार तो तीन माह में ही कई मुकाबलों के लिए वजन ले लिया जाता है। कुश्ती के लिए सुबह छह बजे वजन कराते हैं, ये कहां का नियम है। देश में इतनी दूरी पर मुकाबला कराते हैं कि खिलाड़ी को उधार लेकर वहां तक पहुंचना पड़ता है। होटल का खर्च भी खिलाड़ी स्वयं ही उठाते हैं। फेडरेशन के पदाधिकारी और कई कोच, अपने परिवार को टूर पर साथ ले जाते हैं।  

खेल मंत्रालय पैसा खर्च करता है, मूल्यांकन नहीं होता

सीनियर खेल अधिकारी, (रिटायर्ड), कुश्ती के चीफ कोच एवं ध्यानचंद अवार्डी रहे ज्ञान सिंह ने बताया, यौन शोषण जैसी समस्या अभी आई है। कोई इस पर बोलने को तैयार नहीं था। इन खिलाड़ियों ने हिम्मत दिखाई है। खेल मंत्रालय पैसा खर्च कर रहा है, लेकिन उसका मूल्यांकन कोई नहीं करता। कोच को लेकर यह मूल्यांकन बहुत जरुरी है। अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी को नेशनल खेल में अवश्य खेलना चाहिए। मैं इस मामले में फेडरेशन के साथ हूं। हालांकि फेडरेशन द्वारा खिलाड़ियों के साथ बहुत खराब व्यवहार किया जाता है, इसमें सच्चाई है। खिलाड़ियों को कुश्ती के अखाड़े से जबरन राजनीति के दंगल में उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। क्या फेडरेशन यह चाहता है कि जंतर-मंतर पर लोगों को हुजूम जोड़ कर हंगामा किया जाए। जब आरोप लगा है तो सरकार को तुरंत जांच करानी चाहिए थी। अध्यक्ष को जांच होने तक हटा दिया जाए। बतौर, ज्ञान सिंह, फेडरेशन के पास कई तरफ से पैसा आता है। उसे खिलाड़ियों पर नहीं खर्च किया जाता। उसमें जगह जगह पर कट लगते हैं। यहीं से भ्रष्टाचार शुरू होता है। यहां तो मामला यौन शोषण तक पहुंच गया है।  

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