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जीआरपी कांस्टेबल मौत मामला: 'मॉब लिंचिंग' की धारा लगाने से नहीं हिचकिचाएंगे, क्राइम ब्रांच डीजी का बड़ा बयान

Mon, 11 May 2026 10:23 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर

सार

ओडिशा के भुवनेश्वर में एक जीआरपी कांस्टेबल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामले में क्राइम ब्रांच डीजी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में जरूरी सुबूत मिलते हैं, तो पुलिस 'मॉब लिंचिंग' की धारा लगाने से नहीं हिचकिचाएगी। फिलहाल 11 लोगों को साधारण हत्या की धारा में गिरफ्तार किया गया है। आइए, मामले को विस्तार से जानते हैं...
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13 महिलाओं समेत होटल से 16 लोग गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ओडिशा में एक जीआरपी कांस्टेबल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अब ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच के महानिदेशक (डीजी) विनयतोष मिश्रा का एक बड़ा बयान सामने आया है। डीजी ने सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिस इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 'मॉब लिंचिंग' (भीड़ द्वारा हत्या) की धारा लगाने से बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाएगी।
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जीआरपी के एक कांस्टेबल पर एक महिला के साथ बलात्कार के प्रयास का आरोप लगा था। इसी आरोप के बाद गुस्साई भीड़ ने उस कांस्टेबल को पीट-पीटकर मार डाला था। इस हत्या के मामले में पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, कई लोगों और संगठनों ने पुलिस की इस बात को लेकर आलोचना की कि पुलिस ने गिरफ्तार लोगों पर केवल हत्या (बीएनएस की धारा 103(1)) का मामला दर्ज किया है, न कि मॉब लिंचिंग (बीएनएस की धारा 103(2)) का। इसी आलोचना के बाद पुलिस को अपना पक्ष साफ करना पड़ा है। मृतक के पिता दुशासन स्वैन ने भी अपनी शिकायत में कहा था कि बलात्कार के प्रयास के आरोप के बाद लोगों के एक समूह ने उनके बेटे की हत्या कर दी।

मॉब लिंचिंग की धारा अभी तक क्यों नहीं लगाई गई?
इस सवाल का जवाब देते हुए क्राइम ब्रांच के डीजी ने पुलिस का रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। उन्होंने समझाया कि बीएनएस की धारा 103(2), जो मॉब लिंचिंग से जुड़ी है, तब लागू होती है जब पांच या उससे अधिक लोग मिलकर किसी की हत्या करते हैं। लेकिन इसमें एक शर्त यह है कि यह हत्या नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या ऐसे ही किसी अन्य आधार पर की गई हो। डीजी ने बताया कि पीड़ित परिवार ने जो एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कराई है, उसमें ऐसी किसी भी बात का कोई जिक्र नहीं है। इसी वजह से यह धारा अभी तक नहीं लगाई गई है।
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क्या जांच के बाद बदलेगी मामले की धारा?
डीजी विनयतोष मिश्रा ने आगे बताया कि चूंकि एफआईआर में जाति, धर्म या समुदाय जैसी किसी बात का उल्लेख नहीं है, इसलिए अभी तक इस मामले में धारा 103(2) लागू नहीं की गई है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि पुलिस किसी को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान ऐसा कोई भी सुबूत या मामला सामने आता है जिससे यह साबित हो कि हत्या किसी खास आधार पर हुई है, तो पुलिस तुरंत बीएनएस की धारा 103(2) के प्रावधान को लागू कर देगी। पुलिस इस मामले में पूरी ईमानदारी से काम कर रही है।

अब तक सिर्फ 11 लोगों को ही पकड़ा गया
जब डीजी से यह पूछा गया कि भीड़ में तो बहुत लोग थे, फिर गिरफ्तारी सिर्फ 11 लोगों की ही क्यों हुई है, तो उन्होंने इसका भी आसान जवाब दिया। डीजी ने समझाया कि 7 मई को घटना वाली जगह पर लोगों का एक बड़ा समूह मौजूद जरूर था, लेकिन वहां मौजूद हर व्यक्ति को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल उन लोगों को गिरफ्तार करेगी जिनकी हत्या में सीधे तौर पर शामिल होने के सबूत (प्रथम दृष्टया) मिलेंगे। बिना सबूत के भीड़ में खड़े हर इंसान को हत्यारा मान लेना सही नहीं है।
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उस दिन घटना वाली जगह पर आखिर क्या हुआ?
यह पूरी घटना 7 मई को भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में बलियंता पुलिस सीमा के तहत आने वाले रामचंद्रपुर पुल के पास हुई थी। भीड़ ने 32 साल के जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। लोगों का आरोप था कि कांस्टेबल ने दो महिलाओं के साथ मारपीट की और एक ने उस पर बलात्कार के प्रयास का भी आरोप लगाया था। इस बीच, क्राइम ब्रांच की एक टीम ने उन दोनों महिलाओं से भी मुलाकात की है, जिनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी और जिनमें से एक ने मृतक कांस्टेबल पर बलात्कार के प्रयास का गंभीर आरोप लगाया था।

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