फाइल फोटोः पी. चिदंबरम
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को कहा कि अगर वे वित्तमंत्री होते और प्रधानमंत्री उन पर नोटबंदी के लिए दबाव डालते तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देते। दिल्ली साहित्य महोत्सव में एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री उन्हें 500 और 1000 के नोटों को अमान्य घोषित करने के लिए कहते तो वे ऐसा न करने की सलाह देते। वे पीएम से कहते कि वह इस तरह का फैसला न लें।
चिदंबरम ने कहा कि वे पीएम को तथ्य और आंकड़ों से अवगत कराकर ऐसा न करने का सुझाव देते। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर इसके बाद भी पीएम उन्हें नोटबंदी के लिए कहते तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देते। महोत्सव में चिदंबरम से पूछा गया था कि अगर अरुण जेटली की जगह वह वित्त मंत्री होते तो मौजूदा हालात में क्या करते।
नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए चिदंबरम ने दावा किया कि भ्रष्टाचार, जाली करेंसी और काला धन को समाप्त करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा नोटबंदी से पूरा नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले का एकमात्र अल्पावधि लाभ यह होगा कि शहरी इलाकों में लोगों का रुझान डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ेगा।
चिदंबरम ने दावा किया कि प्रधानमंत्री को नोटबंदी के असर के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई और मुख्य आर्थिक सलाहकार को भी इस बारे में नहीं बताया गया। चिदंबरम ने कहा कि अगर सरकार ने मामले को गुप्त रखने के मकसद से विपक्ष के किसी नेता को विश्वास में नहीं लिया, तो कम से कम उसे अपनी पार्टी के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा से इस मुद्दे पर सलाह-मशविरा कर लेना चाहिए था।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी सरकार इस मुद्दे पर बातचीत कर सकती थी।