बैरिया तहसील के चांद दियर ग्राम पंचायत के समीप नेशनल हाईवे 31 पर शनिवार को घाघरा का पानी पहुंच जाने से बलिया और छपरा (बिहार) दोनों तरफ से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। वाराणसी में गंगा-वरुणा के उफान ने कई इलाकों को चपेट में ले लिया। बलिया में बाढ़ से 50 हजार लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया। गाजीपुर में ताड़ीघाट रेलवे स्टेशन परिसर में बाढ़ का पानी घुसने से दूकानें बंद हो गईं। उधर, रिहंद डैम का जलस्तर बढ़कर 872.4 फीट पहुंच गया।
नेशनल हाईवे 31 पर बैरिया तहसील के चांद दियर ग्राम पंचायत के यादव नगर के सामने एनएच 31 पर घाघरा का पानी पहुंचने पर सुबह करीब दस बजे जिलाधिकारी गोविंद राजू एनएस मौके पर पहुंचे तथा भारी वाहनों का प्रवेश रोकवा दिया। इसके अलावा मांझी पुल की दूसरी तरफ बिहार की तरफ से भी भारी वाहनों का परिचालन रोक दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि राहत आयुक्त से एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की मांग की गई है। वाराणसी में गंगा खतरा बिंदु से 41 सेंटीमीटर ऊपर हैं। गंगा, वरुणा, असि किनारे 10 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। अस्सी, नगवा, गंगोत्री बिहार, सामने घाट, मदरवा, गड़वा घाट से तारापुर टिकरी से आगे सैकड़ों घरों, गलियों में पानी भर गया है।
बलिया में गंगा और टोंस का पानी बढ़ रहा है। बाढ़ से कुल 24 गांव प्रभावित हैं। थम्हनपुरा से सागरपाली तक संपर्क मार्ग डूब जाने से अंजोरपुर, मझरिया, इंदरपुर, थम्हनपुरा, हसनपुरा, गंगहरा, बघेजी आदि गांवों के 50 हजार से अधिक लोग जिला मुख्यालय से कट गए हैं। गाजीपुर में गंगा के साथ गोमती, बेसो, भैंसहीं, मगई, उदंती भी उफान पर हैं। दर्जनों गांव पानी से घिर गए हैं। डीएम आवास और ताड़ीघाट रेलवे स्टेशन परिसर में पानी घुस गया। चंदौली में गंगा की बाढ़ से 157 गांवों के एक लाख लोग प्रभावित हैं। प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है।
जौनपुर में गोमती का जलस्तर बढ़ने से केराकत तहसील के चंदवक इलाके के 12 गांवों में घुस गया। इससे लोग पलायन कर रहे हैं। मवेशियों के लिए चारे का संकट हो गया है। प्रशासनिक अमला गांव में नहीं पहुंचा है। भदोही में बदरी और हरिरामपुर गांव में पानी घुस गया है। मिर्जापुर में गंगा का पानी चुनार में खतरे का निशान पार गया। नरायनपुर, कोन, छानबे और कछवां ब्लॉक के कई गांव बाढ़ में घिर गए हैं। लोगों ने छतों पर बसेरा कर लिया है। पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए स्वच्छ जल की दिक्कत है।