जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान पूर्वी एशिया में चावल की पैदावार व गुणवत्ता में गिरावट ला रहा है। रात का तापमान चावल की गुणवत्ता में कमी का मुख्य कारण है।
तापमान में गिरावट की बड़ी सीमा जापान में 12 और चीन में 18 डिग्री सेल्सियस पर शुरू होती है। स्थिति यह है कि जापान चावल की कमी से जूझ रहा है, क्योंकि पिछले वर्ष भीषण गर्मी के कारण गुणवत्ता संबंधी समस्याओं के कारण वितरण में गिरावट आई है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित शोध अध्ययन ने चावल की गुणवत्ता में गिरावट के लिए बदलते तापमान को जिम्मेदार ठहराया है।
शोधकर्ताओं ने जापान व चीन से चावल की गुणवत्ता के पैटर्न का पता लगाने के लिए 35 वर्षों में एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग किया। यह हेड राइस रेट (एचआरआर) पर आधारित है। एचआरआर मिल्ड चावल के दानों के हिस्से की एक माप है जो मिलिंग के बाद अपनी लंबाई का 75% हिस्सा बनाए रखता है। इस दौरान भूसी और चोकर को हटा दिया जाता है। हेड राइस को आमतौर पर धान के चावल के प्रतिशत के रूप में बताया जाता है। चीन के लिए सभी जगहों और वर्षों में चावल की औसत गुणवत्ता का एचआरआर लगभग 62% था, लेकिन इसमें हर दशक में 1.45% की कमी आई। वहीं, जापान में औसत एचआरआर थोड़ा अधिक लगभग 66% था। इसमें हर दशक में 7.6% की गिरावट हुई।
तालमेल की संभावना कम
शोधकर्ताओं के मुताबिक, धान की विभिन्न किस्म की फसलों और जलवायु परिवर्तन की दर के साथ सामंजस्य की संभावना कम है। यह समस्या आने वाले वर्षों में स्थायी खाद्य आपूर्ति, मानव पोषण और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
ये कारण भी रहे जिम्मेदार
जब चावल की बाली में अनाज की वृद्धि होती है तब बढ़ते तापमान के कारण अनाज में प्रकाश संश्लेषण और स्टार्च जमा होने की दर कम हो जाती है। इससे चावल की गुणवत्ता कम हो जाती है। प्रतिदिन होने वाला सौर विकिरण चावल की गुणवत्ता में बदलाव में योगदान देने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा धान की फसल के मौसम में होने वाली बारिश और उसकी आवृत्ति व दिन के समय वाष्प दबाव की कमी गुणवत्ता में गिरावट के लिए जिम्मेदार थी।
आने वाले दशकों में गिरावट जारी रहेगी
अध्ययन में यह भी पाया गया कि वर्ष 2020 और 2100 के बीच कम उत्सर्जन परिदृश्यों के तहत जापान के लिए एचआरआर में 0.5 और चीन के लिए 1.5 फीसदी की कमी की संभावना है। जैसे-जैसे मॉडल उत्सर्जन बढ़ता है, 2050 के बाद एचआरआर में और अधिक कमी आने का अनुमान है। यह 2100 तक चीन में पांच फीसदी से अधिक हो सकता है।