जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
इंसानी गतिविधियों के कारण बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता और पर्यावरण को हो रहे नुकसान, विदेशी प्रजातियों के हमलों और आवासों को हो रहे नुकसान की वजह से कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। यह बीमारियां न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों और पेड़ पौधों के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं। इन प्रभावों को गहराई से समझने के लिए नॉट्रे डेम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नया अध्ययन किया है। इसके नतीजे अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर में प्रकाशित हुए हैं।
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आठ अलग-अलग भाषाओं में पहले से मौजूद 972 शोधों के करीब 2,938 अवलोकनों का विश्लेषण किया है, ताकि यह समझा जा सके कि संक्रामक रोग, वैश्विक बदलावों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। इसमें पौधों, जानवरों और मनुष्यों को प्रभावित करने वाले मेजबान और परजीवियों के 1,497 संयोजनों को शामिल किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने उन पांच कारकों पर ध्यान केंद्रित किया है जो दुनिया भर के पारिस्थितिक तंत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव की वजह बन रहे हैं। इनमें जैवविविधता को हो रहे नुकसान, जलवायु परिवर्तन, रासायनिक प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रसार और प्राकृतिक बसेरों में हो रहा बदलाव और नुकसान शामिल हैं। इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान, औसत तापमान और वर्षा के पैटर्न में आ रहा बदलाव भी शामिल था। इसके साथ ही जीवों के प्राकृतिक आवासों को हो रहे नुकसान के कारण जंगलों के बिखराव और बेतरतीब ढंग से तेजी से हो रहे शहरीकरण को भी शामिल किया गया था।
समय रहते सावधान होना जरूरी
शोधकर्ता जेसन रोहर कहते हैं कि संक्रामक रोग बढ़ रहे है और मनुष्य पर्यावरण में व्यापक बदलाव कर रहा है, लेकिन इस बारे में सटीक जानकारी नहीं है कि वह कौन से बदलाव हैं जो इन बीमारियों को सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं। पर्यावरण में किए कई बदलाव जानवरों और मनुष्यों में परजीवियों को बढ़ाते हैं। इसका मतलब है कि इन बदलावों से जानवरों से मनुष्यों में अधिक बीमारियां फैल सकती हैं। साथ ही इनकी वजह से महामारी का खतरा बढ़ सकता है। पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगे इसके पहले ही हमें सावधान हो जाना चाहिए।