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शोध: वायु प्रदूषण इम्यून सिस्टम पर कर रहा वार, बच्चों को भी दिमागी रूप से कर रहा कमजोर

Mon, 15 Jul 2024 05:16 AM IST
मेघा झा अमर उजाला, ब्यूरो

सार

बढ़ता वायु प्रदूषण शरीर में इम्यून सिस्टम को ही शरीर का दुश्मन बना रहा है। ताजा अध्ययन से पता चला है कि लंबे समय तक दूषित हवा में सांस लेने से ल्यूपस नामक रोग होने का खतरा बढ़ रहा है।
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वायु प्रदूषण - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बढ़ता वायु प्रदूषण शरीर में इम्यून सिस्टम को ही शरीर का दुश्मन बना रहा है। ताजा अध्ययन से पता चला है कि लंबे समय तक दूषित हवा में सांस लेने से ल्यूपस नामक रोग होने का खतरा बढ़ रहा है। ल्यूपस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर को बीमारियों से बचाने वाला अपना इम्यून सिस्टम ही शरीर का दुश्मन बन जाता है। शोध के नतीजे जर्नल आर्थराइटिस एंड रूमेटोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।
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शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह बीमारी स्किन, किडनी, ज्वाइंट्स, ब्लड सेल्स, दिमाग, दिल और फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि ल्यूपस के लक्षण दूसरी बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं, ऐसे में इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। जिन लोगों में आनुवंशिक जोखिम अधिक था और जो वायु प्रदूषण के संपर्क में अधिक रहते हैं, उनमें ल्यूपस होने की आशंका सबसे अधिक होती है। वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों में आनुवंशिक जोखिम कम है और जो वायु प्रदूषण के संपर्क में कम आते हैं उनमें इस बीमारी के होने की आशंका कम रहती है।

4 लाख से ज्यादा लोगों पर 12 वर्षों तक किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक द्वारा जुटाए 4,59,815 लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया है। करीब 12 वर्षों तक अध्ययन करने पर 399 लोग ल्यूपस से पीड़ित पाए गए। अध्ययन में प्रदूषण के महीन कणों पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और नाइट्रिक ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के स्तर को भी मापा गया है।
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इनके स्तर का अनुमान लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने विशेष गणितीय मॉडल का उपयोग किया है। इस मॉडल की मदद से यह भी जानने का प्रयास किया गया है कि क्या ये वायु प्रदूषक ल्यूपस के विकास से जुड़े थे। ठोस नतीजों के लिए पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर की भी मदद ली गई है ताकि यह देखा जा सके कि जीन और वायु प्रदूषण एक साथ ल्यूपस के जोखिम को कैसे प्रभावित करते हैं।

गर्भस्थ शिशुओं के लिए भी खतरनाक  
जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अन्य शोध अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि अजन्मों के गर्भावस्था में वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से आगे चलकर किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने भी खुलासा किया है कि वायु प्रदूषण का संपर्क बच्चों को दिमागी तौर पर कमजोर बना रहा है। इससे उनकी बौद्धिक और ध्यान लगाने की क्षमता प्रभावित हो रही है।

कड़े नियमों पर जोर देना समय की जरूरत
चीन के हुआझोंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता योहुआ तियान के अनुसार हमारा यह शोध कार्य इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है कि वायु प्रदूषण किस प्रकार स्वप्रतिरक्षी रोगों को प्रभावित करता है। अध्ययन के निष्कर्ष वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कड़े नियमों को बनाने पर जोर देते हैं ताकि ल्यूपस के जोखिम को सीमित किया जा सके। समय की जरूरत है कि वायु प्रदूषण के खतरों को पहचान कर उनके निदान के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं।
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