आपने यह तो सुना ही होगा कि योग करने से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल समेत तमाम अन्य गंभीर बीमारियों में फायदा होता है। लेकिन आपको इस बात का अंदाजा है कि योग करने से हमारे शरीर में रक्त बनाने वाली कोशिकाओं की वृद्धि होती है। क्या आपको यह पता है कि नियमित योग करने से हमारे शरीर में उन स्टेम सेल्स की वृद्धि होती है, जिन्हें रिप्रोडक्टिव सेल्स कहते हैं। योगिक क्रियाओं के इन फायदों को जानने के लिए चंडीगढ़ पीजीआई स्थित देश के पहले योगा सेंटर में न्यूरो साइंटिस्ट विभाग ने एक शोध हुआ। कई महीनों तक चले शोध के नतीजों से पता चला कि रोजाना 45 मिनट तक योग करने से हमारे शरीर में खून बढ़ाने वाली कोशिकाओं के नए मॉलिक्यूल बनने शुरू हो गए। यही नहीं शरीर में मौजूद ब्लड मॉलिक्यूलर स्तर में भी परिवर्तन आने लगा। इन सबके अलावा शरीर में और ऐसी कई कोशिकाओं का जन्म हुआ जो बीमारियों से लड़ने में सहायक है। इस शोध को जर्नल आफ मल्टीडिसीप्लिनरी हेल्थ केयर में प्रकाशन हो चुका है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से इसी शोध के आधार पर देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ मिलकर अन्य योगिक क्रियाओं पर रिसर्च शुरू की गई है।
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तीन महीने तक किया गया शोध, नतीजे चौंकाने वाले
प्रधानमंत्री मोदी की योग की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए देश के पहले योगा सेंटर में योगिक क्रियाओं के आधार पर शोध की योजना बनाई गई। इस शोध में शामिल प्रमुख रिसर्चर ने तय किया कि एक महीने और तीन महीने की कड़ी में अलग-अलग यौगिक क्रियाओं के आधार पर शोध किए जाएंगे। इसके लिए चंडीगढ़ पीजीआई की न्यूरोसाइंस लैब ने 300 सामान्य व्यक्तियों का चयन किया। योगिक क्रियाओं के माध्यम से शोध करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक सभी 300 लोगों की ब्लड रिपोर्टस पहले तैयार की गईं। उसके बाद एक महीने तक 45 मिनट तक योग क्रियाओं के माध्यम से स्वस्थ रहने के फॉर्मूले पर काम किया गया। शोध में शामिल वैज्ञानिकों का कहना है कि एक महीने के बाद उन सभी 300 लोगों की रिपोर्ट दोबारा कराई गई तो उनमें बड़े बदलाव दिखे। जिसमें ब्लड प्रेशर से लेकर डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल से लेकर अन्य बीमारियों के लिए ब्लड पैरामीटर्स सामान्य पाए गए। शोध करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआत के एक महीने की आई रिपोर्ट के आधार पर ही इस शोध को और आगे बढ़ाने के लिए ही पूरी कार्ययोजना तैयार की गई।
तीन महीने तक बगैर दवाओं के साथ योग
योगिक क्रियाओं के आधार पर भी दूर होने वाली बीमारियों को साइंटिफिक एविडेंस के साथ समूची दुनिया में आगे बढ़ाने के लिए किए जाने वाले शोध की अब दूसरी कड़ी थी। शोध में शामिल लोगों ने बताया कि वे लो ब्लड प्रेशर, शुगर और लिपिड प्रोफाइल की दवाएं खाते थे। जब वह न्यूरोसाइंस लैब के इस प्रक्रिया का हिस्सा बने, तो उन्होंने अपने डॉक्टर की सलाह पर इन दवाओं को सिर्फ इमरजेंसी में ही लेने की मंजूरी ली। योगिक क्रियाओं पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक तीन महीने तक इस शोध में शामिल लोगों ने रोजाना 45 मिनट योग किया। तीन महीने बाद सभी लोगों के एक बार फिर से ब्लड सैंपल लिए गए। जो लोग दवाएं लेते थे, उनकी भी रिपोर्ट बगैर दवाओं के सामान्य आई। वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन महीने के अंतराल पर शुगर के लिए ली जाने वाली एचबीए 1 सी की रिपोर्ट भी सामान्य रेंज में आ गई। जबकि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी सामान्य हो गया।
शरीर में नए मॉलिक्यूल बने, रिलैक्सिंग न्यूरोट्रांसमीटर बढ़े
जर्नल ऑफ मल्टीडिसीप्लिनरी हेल्थ केयर में प्रकाशित शोध के मुताबिक योग करने वाले सभी लोगों के ब्लड बायो मार्कर भी चेक किए गए। इस दौरान पता चला कि शरीर में रक्त बनाने वाली कोशिकाओं की वृद्धि भी हुई है। जर्नल में शोधकर्ताओं की रिसर्च से पता चलता है कि जिन लोगों ने योगिक क्रियाएं कीं उनके शरीर में नए मॉलिक्यूल बनने लगे। इस दौरान शरीर के भीतर वीईजीएफ नाम का मॉलिक्यूल बना, जो कि शरीर में रक्त बनाने वाली कोशिकाओं में बढ़ोतरी करता है। शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे शरीर में रक्त बढ़ाने वाली कोशिकाओं के बनने से न सिर्फ रक्त संचार बेहतर होता है, बल्कि ब्लड प्रेशर समेत अन्य बीमारियों में भी इसका फायदा मिलता है। इसके अलावा 3 महीने तक योग क्रियाओं के शोध के आधार पर इसमें शामिल लोगों के ब्रेन में रिलैक्स रहने वाले न्यूरोट्रांसमीटर ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रॉपिक फैक्टर (बीडीएनएफ) की भी बढ़ोतरी देखी गई। इसके चलते लोगों में बेवजह बढ़ने वाले तनाव में कमी भी पाई गई।
स्टेम सेल भी बढ़ने लगे शरीर में
तीन महीने तक चले इस शोध में पता चला कि शरीर के अंदर कई तरह के मॉलिक्यूल में न सिर्फ बदलाव हो रहा है, बल्कि ऐसी नई कोशिकाएं भी जन्म ले रही हैं, जो गंभीर से गंभीर बीमारियों से लड़ने में सहायक है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चंडीगढ़ पीजीआई के योगा सेंटर की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट और इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक पाया गया कि सभी मरीजों में स्टेम सेल्स (वह कोशिकाएं जो रिप्रोडक्टिव कोशिकाएं कहलाती हैं) की भी बढ़ोतरी हुई। न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया से जुड़े डॉक्टर एसएन भार्गव कहते हैं कि योगिक क्रियाओं के आधार पर किए गए इस शोध ने न सिर्फ न्यूरोसाइंस बल्कि एलोपैथ के माध्यम से हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति और योग को साइंटिफिक एविडेंस के तौर स्थापित किया है। डॉ भार्गव कहते हैं कि अभी तक योग पर इतना विस्तृत शोध और उसके नतीजों की किसी भी प्रमुख मेडिकल साइंस इंस्टिट्यूट में नहीं हुई थी।
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में चल रहे हैं योग पर शोध
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस रिपोर्ट को एक प्रमुख आधार मानते हुए देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में आगे के नए शोध को बढ़ाया जा रहा है। इस दिशा में नई दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंस समेत सभी ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज समेत देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को योग के साथ मिलकर वैज्ञानिक आधार पर रिसर्च की जा रही है। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को अहम रूप से मान्यता देते हुए गुजरात में खोले गए प्रमुख सेंटर में भी न सिर्फ तमाम तरह के शोध, बल्कि उसके आधार पर तैयार की जाने वाली प्रीवेंटिव मेडिसिन के क्षेत्र में भी बड़ा काम किया जा रहा है।