डॉ. अमन किशोर
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आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है, जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं, जिनका कोई अपना आत्महत्या करके चला जाता है। आत्महत्याओं की खबरें हर रोज अखबारों की सुर्खियां बनती हैं।
आत्महत्याओं की खबरें समाज विकास की विडंबना पूर्ण एवं त्रासद तस्वीर को बयां करती हैं। वहीं, आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने का है। देश-दुनिया में रोजाना कई लोग आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं। आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए इसके शुरुआती लक्षणों का पता होना बहुत जरूरी होता है।
आत्महत्या के शुरुआती लक्षणों का पता होने पर हम किसी की जान बचाने में सफल हो सकते हैं। डॅाक्टरों का मानना होता है कि कोई भी व्यक्ति अचानक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम नहीं उठाता है। आत्महत्या करने वाला व्यक्ति बहुत लंबे समय से सुसाइड करने के बारे में सोच रहा होता है।
मगर इन सब के बीच सवाल उठता है कि इसे रोका कैसे जाए तो आप जुड़िए
अमर उजाला के साथ और पूछें अपने सवाल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमन किशोर से। डॉ. किशोर आज शाम पांच बजे हमारे फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर लाइव होंगे। इस दौरान आप सब उनसे सवाल पूछ सकते हैं, तो जुड़िए हमारे साथ आज शाम पांच बजे...