सूअर की पिग्मी हॉग प्रजाति को बचाने के लिए राज्य सरकार के अलावा कई अन्य संगठन भी आगे आ रहे हैं। भारत में साठ के दशक के बाद से इसकी संख्या लगातार कम हो रही थी, लेकिन संरक्षणवादियों ने इसे बचाने के लिए संकल्प लिया है।
दुनिया की सबसे छोटी प्रजाति के सूअरों को बचाने की कवायद एक बार फिर से शुरू हुई है। छोटे सूअरों की प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। देश के पशु संरक्षणवादी लगातार इसे बचाने में जुटे हैं इसी कड़ी में विलुप्त हुए पिग्मी हॉग की आबादी बढ़ाने के एक लिए संरक्षण कार्यक्रम के तौर पर पूर्वोत्तर भारत के जंगल में छोड़ा गया है। असम के मानस नेशनल पार्क में इन सूअरों को जंगल में छोड़ा गया है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी वहां पहुंचे। पिग्मी हॉग का वैज्ञानिक नाम पोर्कुला साल्वेनिया है। यह लंबे, गीले घास के मैदानों में रहता है। यह कभी भारत, नेपाल और भूटान में हिमालय क्षेत्र के मैदानी इलाकों में पाया जाता था।
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दरअसल, 1960 के दशक में इसकी आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई। 1971 में भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में यह पूरी तरह से विलुप्त हो गया। 1993 तक, यह केवल असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के कुछ हिस्सों में पाया गया था, जो भूटान की सीमा में है। संरक्षणवादियों के मुताबिक,