भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत के प्रतीक के रूप में विश्वभर में विख्यात स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर आज यानी 26 मार्च को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। वैश्विक बीएपीएस संस्था के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज यहां 108 फीट ऊंची तपोमूर्ति श्री नीलकंठ वर्णी (भगवान स्वामीनारायण) की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। पंचधातु से बनी यह मूर्ति विश्व में अपनी तरह की पहली मूर्ति है, जिसमें भगवान को एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करते हुए दर्शाया गया है। यह उनकी कठोर साधना का प्रतीक है। इस भव्य आयोजन की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।
विश्व शांति महायज्ञ से हुआ आयोजन का आगाज
इस आयोजन की शुरुआत 25 मार्च की सुबह श्री नीलकंठ वर्णी विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुई। अक्षरधाम परिसर में वैदिक विधि से संपन्न इस यज्ञ में दुनिया भर से आए 300 से अधिक संत शामिल हुए, जिनमें ब्रिटेन, फ्रांस, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संत भी शामिल हैं।