दुनिया के सबसे लंबे समय तक सेवारत रहे 76 साल पुराने ऐतिहासिक युद्धपोत आईएनएस विराट (INS Viraat) को गुजरात के अलंग तट पर पहुंच मौजूद है। तीन साल पहले भारतीय नौसेना ने इसे रिटायर कर दिया था जिसके बाद अब 28 सितंबर को इसका विसर्जन किया जाएगा।
इस युद्धक विमान वाहक पोत ने शनिवार को मुंबई में नौसेना डॉकयार्ड से अपनी अंतिम यात्रा शुरू की और सोमवार शाम को भावनगर जिले के अलंग पहुंच गया। इसे अलंग में जहाज तोड़ने वाले यार्ड में उतारा गया और फिर स्क्रैप के रूप में बेचा जाएगा।
विसर्जन की औपचारिकताएं
इस युद्धपोत को जिसे 1987 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। अब इसे श्री राम ग्रुप ने इस साल जुलाई में एक नीलामी में 38.54 करोड़ रुपये में खरीदा था। श्री राम ग्रुप के चेयरमैन मुकेश पटेल ने कहा कि जहाज तोड़ने वाले कोड के अनुसार औपचारिकताएं पूरा करने के लिए सरकारी अधिकारी जहाज पर सवार हैं। गुरुवार से कस्टम, गुजरात मैरिटाइम बोर्ड (जीएमबी), गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) और एईआरबी सहित प्राधिकरण की जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
निकाले गए अहम पुर्जे
2017 में इसे ऐतिहासिक जहाज को रिटायर करने के बाद कोच्चि में सबसे पहले इसके इंजन और जनरेटर निकाल लिए गए। इसके बाद में इस जहाज की वायरिंग को निष्क्रिय कर इसका रडार, पंखे, नेविगेशन उपकरण, ब्रिज रूम सहित दोबारा इस्तेमाल में आने वाले सभी उपकरण निकाल लिए गए।
27 बार दुनिया का चक्कर लगा सके इतना सफर तय किया
आईएनएस विराट के नाम दुनिया के सबसे लंबे समय तक सेवारत युद्धपोत होने का रिकॉर्ड है। सेकंड सेंटोर-क्लास के इस विमान वाहक जहाज ने 29 साल तक भारतीय नौसेना की सेवा की। 29 साल के इतिहास में इस जहाज ने कुल 10,94,215 किलोमीटर का सफर तय किया है। यह दूरी इतनी है कि अगर यह धरती के गोल-गोल घूमती तो इसके 27 चक्कर पूरे कर लेती। 1944 में बने इस जहाज की प्लेट, डेक-रन-वे आज भी काफी मजबूत हैं। पूर्व में ऐसा भी एक प्रस्ताव आया कि इस जहाज को समुद्री संग्रहालय के रूप में संरक्षित कर रखा जाए।
लेकिन जुलाई 2019 में केंद्र सरकार ने संसद में कहा कि आईएनएस विराट को स्क्रैप करने का निर्णय भारतीय नौसेना के साथ उचित परामर्श के बाद लिया गया था। भारत में टूटने वाला यह दूसरा विमान वाहक पोत है। इससे पहले 2014 में आईएनएस विक्रांत को मुंबई में तोड़ा गया था।
इस विमान वाहक पोत ने अपने पहले अवतार में 1982 में रॉयल ब्रिटिश नेवी के लिए अर्जेंटीना के खिलाफ फॉकलैंड्स युद्ध जीता था।