फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत में बना नेत्रहीनों के लिए विश्व का पहला मानचित्र

Mon, 09 Jan 2017 03:20 AM IST
एजेंसी/ तिरुपति
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : Reuters
विज्ञापन
नेत्रहीनों के लिए एटलस बनाना आसान नहीं है लेकिन भारत में ऐसे लोगों के लिए बने विश्व के पहले संपूर्ण एटलस ने नेत्रहीनों ही नहीं, पूरी दुनिया को दिशा दिखाई है। देखने में सक्षम लोगों के लिए एटलस का इस्तेमाल बेहद सामान्य है लेकिन अब तक लाखों नेत्रहीनों के लिए यह वर्जित फल ही रहा है। 
विज्ञापन


सक्षम लोग अपने स्मार्टफोन में नक्शे की मदद से नजदीकी कॉफी शॉप, मेट्रो स्टेशन का पता आसानी से लगा लेते हैं। लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से भारत के 2.80 करोड़ नेत्रहीन भी ये सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। 

कोलकाता के नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गेनाइजेशन ने कई साल की मेहनत के बाद इसे तैयार किया है। उनके लिए बने एटलस की मदद से अब दृष्टिहीन लोग भी यह महसूस सकेंगे कि भारत कैसा दिखता है। इसे ब्रेल एटलस नाम दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

'दृष्टिहीन लोगों के लिए विश्व का पहला पूर्ण मानचित्र'

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति और पूर्व सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया पृथ्वीश नाग ने बताया कि यह दृष्टिहीन लोगों के लिए विश्व का पहला पूर्ण मानचित्र है। नाग इस मानचित्र को तैयार करने की मुहिम का नेतृत्व कर रहे थे। 

इस संबंध में अन्य वैश्विक प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक एटलस बनाने के ज्यादातर प्रयास निजी प्रयोग के लिए ही हुए हैं। सभी लोगों के लिए उपलब्ध पूर्ण एटलस तैयार करने का यह अपनी तरह का पहला प्रयास है। इस एटलस को कागज पर सिल्क स्क्रीन प्रिंटिंग का इस्तेमाल कर उभारा गया है ताकि दृष्टिहीन लोग इसे महसूस कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह एटलस तैयार करने के लिए तीन जनवरी को भारतीय विज्ञान कांग्रेस में नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गेनाइजेशन की निदेशक ताप्ति बनर्जी को नेशनल अवार्ड फोर साइंस एंड टेकभनोलॉजी इंटरवेंशन इन एंपावरिंग द फिजिकल चैलैंज्ड सम्मान से सम्मानित किया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें