दुनिया भर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागररूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य यह है कि विश्व के हर एक व्यक्ति बढ़ती जनसंख्या की ओर ध्यान दे और जनसंख्या को रोकने में अपनी भूमिका निभाए। बढ़ती जनसंख्या विश्व के कई देशों के सामने बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है। खासकर विकासशील देशों में जनसंख्या विस्फोट एक गंभीर चिंता का विषय है। इस दिन लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृत्व स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है।
इस वर्ष का विषय विशेष रूप से कोरोना महामारी के समय में दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है। काम पर जाने वाली महिलाएं अक्सर असुरक्षित माहौल में काम करती हैं। श्रम बाजार में भी प्राय: महिलाओं की सुरक्षा के उपायों को खास तवज्जो नहीं दी जाती। यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान भी महिलाएं इसके आर्थिक प्रभावों से बहुत प्रभावित हुई हैं। दुनियाभर में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं अपने श्रम के माध्यम से अनौपचारिक रूप से अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं, ऐसे में उन पर पड़े आर्थिक प्रभाव की वजह से गरीबी के और बढ़ने का अधिक खतरा है।
वर्तमान में सबसे तेज गति से जनसंख्या वृद्धि करने वाला देश नाइजीरिया है, जिसके वर्ष 2050 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना है। दुनियाभर में बुजुर्गों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 1950 में बुजुर्गों से कहीं ज्यादा संख्या में युवा थे।