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पेड़ों को जीवित प्राणी का दर्जा दिलाना चाहता है ये 'ग्रीन मैन', अब तक बचाए 10 लाख पेड़

Mon, 16 Sep 2019 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
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VijayPal Baghel Green man - फोटो : Facebook
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प्रकृति की लगातार अनदेखी के कारण पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। आज भारत में प्रति व्यक्ति केवल 28 पेड़ बचे हैं, जबकि वैश्विक आदर्श स्थिति के मुताबिक यह संख्या 500 होनी चाहिए। इस चिंताजनक तस्वीर के बीच गाजियाबाद के विजयपाल बघेल ऐसे व्यक्ति हैं, जो पिछले 42 साल से रोज कम से कम एक पेड़ जरुर लगा रहे हैं। पेड़ लगाने की उनकी इस मुहिम के कारण लोग उन्हें 'ग्रीन मैन' कहकर पुकारते हैं। उनके इस काम के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल हो चुका है। उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार सहित लगभग 200 पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

पेड़ों को मिले जीवित प्राणी का दर्जा

विजयपाल बघेल उर्फ ग्रीन मैन कहते हैं कि पेड़ों को लगाने के लिए सबको साथ आने की जरुरत है। इसके लिए वे 'मिशन 125 करोड़' चला रहे हैं। इसमें वे देश के हर व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ लगाने के लिए कह रहे हैं। इसके अलावा वे 'हरित सत्याग्रह' नाम से एक आंदोलन भी चला रहे हैं, जिसके अंतर्गत वे पेड़ों को भी एक जीवित प्राणी का दर्जा दिलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस तरह पेड़ों के अधिकार सुनिश्चित किये जा सकेंगे, जिससे पेड़ों की अवैध कटाई रोकी जा सकेगी। उनकी कोशिश है कि 23 अगस्त को विश्व पेड़ दिवस घोषित किया जाए। यूनेस्को की कई पर्यावरण योजनाओं से जुड़े रहे विजयपाल इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में अपील भी कर चुके हैं।

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पेड़ों को बचाने की अपनी मुहिम में विजयपाल बघेल उर्फ ग्रीन मैन अब तक लाखों पेड़ों को बचा चुके हैं। उनकी पहल पर अदालत के आदेश के बाद गंगा एक्सप्रेस वे, हिंडन एक्सप्रेस वे और यूजीसी एक्सप्रेस वे की राह में कई बदलाव करने पड़े, जिसके चलते लगभग 10 लाख पेड़ों को बचाया जा सका है।

दादा की सीख दे गई सबक

विजयपाल बघेल उर्फ ग्रीन मैन ने अमर उजाला को बताया कि बचपन में वे एक बार अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा दाताराम के साथ बाजार जा रहे थे। रास्ते में कुछ लोग गूलर का एक पेड़ काट रहे थे। गूलर के पेड़ से कुछ द्रव्य पदार्थ निकल रहा था, जब उन्होंने अपने दादा से इस द्रव के बहने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि पेड़ काटा जा रहा है, इसलिए उसके आंसू निकल रहे हैं। दादा की यह बात बच्चे विजयपाल को इतनी तकलीफ दे गई कि वे उस पेड़ को बचाने की जिद करने लगे। दादा के हस्तक्षेप के बाद लोगों ने पेड़ काटना बंद कर दिया। उस दिन के बाद ही विजयपाल ने पेड़ों को बचाना अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया।

कैसे पड़ा ग्रीन मैन का नाम

विजयपाल बघेल ने बताया कि वर्ष 2007 में अमेरिकी उपराष्ट्रपति अलगोर ने पर्यावरण लीडर्स की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। नोबेल पुरस्कार विजेता अल गोर की इस रिपोर्ट में पूरी दुनिया से 500 पर्यावरणविदों को जगह दी गई थी। भारत से इस लिस्ट में विजयपाल बघेल का नाम शामिल किया गया था। लिस्ट में विजयपाल बघेल के नाम के पहले ग्रीन मैन लिखा गया था। बाद में मीडिया और लोगों ने इसे ही उनकी पहचान बना दी जिसके बाद वे ग्रीन मैन के नाम से पहचाने जाने लगे।

भारत में गिर रहा ऑक्सीजन का स्तर

विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day, 16 September) पर पर्यावरण पर अपनी चिंता जताते हुए विजयपाल बघेल ने कहा कि भारत की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। प्रकृति के सामान्य वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर 21 फीसदी होना चाहिए, जबकि अपने कार्य के दौरान मापने के बाद उन्होंने पाया है कि यह स्तर बेहद कम होता जा रहा है। अगर यही स्थिति जारी रहती है, तो जल्दी ही आने वाले समय में लोगों को ऑक्सीजन का सिलिंडर लगाकर चलना पड़ेगा।

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