मासिक धर्म स्वच्छता सर्वेक्षण में 35 से अधिक शहरों की 18 से 35 वर्ष की 6,000 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं में 53.2 फीसदी ने बताया कि मासिक धर्म के पहले दो दिनों के दौरान अच्छी नींद नहीं ले पाती हैं। जबकि, 67.5 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे इस दौरान सोते समय दाग लगने के डर से बेचैन रहती हैं।
गंदे सार्वजनिक शौचालयों से संक्रमण का डर, दाग लगने की चिंता, नींद नहीं आना और दर्द मासिक धर्म के दौरान ये प्रमुख समस्याएं हैं, जिनसे देशभर में महिलाओं को जूझना पड़ रहा है। 28 मई को मनाए गए ‘मासिक धर्म स्वच्छता दिवस’ के सिलसिले में स्वच्छता ब्रांड एवरटीन की तरफ से कराए गए मासिक धर्म स्वच्छता सर्वेक्षण में महिलाओं की इन समस्याओं का पता चला।
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सर्वेक्षण में 35 से अधिक शहरों की 18 से 35 वर्ष की 6,000 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं में 53.2 फीसदी ने बताया कि मासिक धर्म के पहले दो दिनों के दौरान अच्छी नींद नहीं ले पाती हैं। जबकि, 67.5 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे इस दौरान सोते समय दाग लगने के डर से बेचैन रहती हैं।
गंदे सार्वजनिक शौचालय बड़ी दिक्कत
57.3 फीसदी महिलाओं ने मासिक धर्म के दौरान मध्यम से गंभीर दर्द का अनुभव किया, जबकि 37.2 फीसदी महिलाओं को इस दौरान हल्का दर्द महसूस होता है। 62.2 फीसदी ने बताया कि सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी की वजह से उन्होंने अपने दफ्तर, मॉल, सिनेमा हॉल जैसी जगहों पर सैनिटरी पैड कभी नहीं बदला है। 74.6 फीसदी का कहना है कि वे सार्वजनिक शौचालय में सैनिटरी पैड बदलने में असहज महसूस करती हैं, जबकि 88.3 फीसदी का मानना है गंदे शौचालयाें में संक्रमित होने का डर रहता है।
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8 फीसदी लड़कियों में 8-9 वर्ष की उम्र से शुरुआत
सर्वेक्षण में मासिक धर्म शुरू होने की औसत उम्र और अवधि के बारे में जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि करीब 8 फीसदी लड़कियों में 8-9 वर्ष की उम्र में मासिक धर्म शुरू हो रहा है। वहीं, 79.3 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने 11-12 वर्ष की उम्र में पहली बार मासिक धर्म का अनुभव किया।
बढ़ रही जागरूकता
एवरटीन के सीईओ हरिओम त्यागी ने कहते हैं कि मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। वर्जनाएं टूट रही हैं। महिलाएं परंपराओं से बाहर निकलकर स्वच्छता को स्वीकार कर रही हैं। हालांकि, अब भी लंबा रास्ता तय करना है। पैन हेल्थकेयर के सीईओ चिराग पान ने कहते हैं कि यह सर्वेक्षण अनुसंधान समुदाय, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के लिए स्पष्ट कार्रवाई में मददगार हो सकता है। सार्वजनिक शौचालयों के स्वच्छता मानक और मूल्यांकन स्थापित करने की नीतियों पर ध्यान देने की जरूरत है।