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परिवार बचाने के लिए भारत की ओर देख रही दुनिया, जानिए क्या है वजह

Thu, 06 Dec 2018 07:45 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विविध कारणों से पूरी दुनिया में विवाह और परिवार जैसी संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं। बढ़ती महंगाई के कारण पति-पत्नी दोनों को काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जिससे बच्चों की परवरिश में मां-बाप अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं। इसके कारण बच्चों की परवरिश बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे बच्चे अपेक्षाकृत पढ़ाई-लिखाई में कमजोर हो रहे हैं और उनका भावनात्मक जुड़ाव भी माता-पिता से कम हो पा रहा है। इसका असर उनके आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है। यह समस्या पूरी दुनिया में है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन इन समस्याओं से निपटने के लिए पूरी दुनिया एक बार फिर भारत की ओर ही देख रही है। 
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किसने किया अध्ययन

फाउंडेशन फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट इन एकेडमिक फील्ड संस्था के एक प्रोजेक्ट 'मदर्स ऑन व्हील्स' के तहत महिलाओं के एक दल ने माधुरी सहस्रबुद्धे के नेतृत्व में दो महीने में 22 देशों की यात्रा कार के माध्यम से की। अपनी यात्रा में महिलाओं ने लगभग 23 हजार किलोमीटर की यात्रा की और हर देश में रुककर वहां की महिलाओं का हाल जाना। वहां की परिस्थितियों में महिलाओं की आर्थिक, समाजिक और पारिवारिक समस्याओं को समझने की कोशिश की। इस वैश्विक अध्ययन में अभी तक ब्रिटेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, क्रोएशिया जैसे देश शामिल हैं। जिनमें भारत और इसके आसपास के नेपाल व चीन और इरान, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। 
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क्या है विशेषज्ञ का अनुभव

महिला दल की नेतृत्वकर्ता माधुरी सहस्रबुद्धे ने बताया कि यह देख काफी हर्ष का अनुभव हुआ कि दुनिया अब अपनी पारिवारिक समस्याओं के निदान के लिए भी भारत की तरफ देख रही है। विश्व समुदाय को यह लगता है कि भारत की संस्कृति, विवाह और पारिवारिक ढांचा उनके टूटते सामाजिक ताने बाने को एक नई जिंदगी दे सकते हैं। इसके लिए वे भारत की संस्कृति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। वे भारत की जीवन शैली को अपनी परिस्थितियों में अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
 
माधुरी सहस्रबुद्धे के मुताबिक महिलाओं की समस्याएं एक जैसी हैं। जिनमें देश, काल और परिस्थितियों के मुताबिक थोड़ी-बहुत असमानता तो देखी जा सकती है लेकिन मूल रूप से पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं की समस्याएं एक जैसी हैं। आज महंगाई के कारण माताओं को अपने घरों से दूर रहकर काम करना पड़ता है जिससे वे अपने बच्चों को पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही हैं। इससे मां और बच्चों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव कम हो गया है। 

इससे बच्चों का विकास प्रभावित हो रहा है और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं। इससे पश्चिमी समाज की समस्या हमारे समाज में भी बढ़ रही है। लेकिन युवाओं को आर्थिक और सामाजिक, दोनों पहलुओं में सामंजस्य स्थापित करने की बात सोचनी चाहिए। 

क्या हो सकता है समाधान

माधुरी सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह समझना बहुत मुश्किल है कि कोई एक फॉर्मूला पूरी दुनिया में एक साथ काम कर सकता है। लेकिन चूंकि यह समस्या परिवार से जुड़ी हुई है, इसका समाधान भी परिवार के स्तर पर ही खोजना पड़ेगा। इसके साथ ही आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए स्थान के पलायन की बजाय आसपास ही विकल्प ढूंढे जाने चाहिए। इसमें यह तो संभव है कि आर्थिक मोर्चे पर परिवार को कुछ समझौता करना पड़े, लेकिन परिवार को बचाने के लिए यह किया जा सकता है। 
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