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विश्व यकृत दिवस: साल में दो लाख लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत, हो रहे 2000, सतर्क रहें, नियमित जांच कराएं

Wed, 19 Apr 2023 05:47 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।

सार

नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिअरी साइंसेज (आईएलबीएस) के निदेशक डॉ. शिव सरीन ने कहा, देश में 100 में से 30 लोग फैटी लिवर की चपेट में है।
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फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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यकृत यानी लिवर हमारे शरीर में दूसरा सबसे अहम अंग माना जाता है जो पाचन, प्रतिरक्षा के साथ ही विषाक्त पदार्थों को शरीर से दूर करता है और इसमें विटामिन, खनिज, ग्लूकोज का भंडार है। इतना शक्तिशाली होने के बाद भी आजकल यह अंग लोगों को बीमार कर रहा है। स्थिति यह है कि आज देश में दो लाख लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत है, लेकिन सालाना पूरे देश में लगभग 2,000 ही किए जा रहे हैं।

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इसे बीमारियों से बचाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को विश्व यकृत दिवस मनाया जाता है और इस वर्ष के लिए थीम है, “सतर्क रहें, लिवर की नियमित जांच कराएं, फैटी लिवर किसी को भी प्रभावित कर सकता है। नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिअरी साइंसेज (आईएलबीएस) के निदेशक डॉ. शिव सरीन ने कहा, देश में 100 में से 30 लोग फैटी लिवर की चपेट में है। यही लोग आगे चलकर मधुमेह, दिल व किडनी से जुड़ी बीमारियों की जद में आ रहे हैं। फैटी लिवर एक महामारी है जिसे रोकने के लिए हमें अपने लिवर का ध्यान रखना शुरू करना होगा।

लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, अगर किसी को फैटी लिवर रहता है तो उसे पेट की ऊपर दाहिने ओर दर्द हो सकता है। भूख कम लगना, वजन गिरना, आंखों का पीला पड़ना, पैरों में हल्की सूजन बनी रहना, हर वक्त थकान या कमजोरी महसूस करना, यह सभी स्वस्थ लिवर न होने की ओर इशारा करते हैं।
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मौजूदा हालात बयां करते आंकड़े  
डॉ. सरीन ने कहा, कम लिवर प्रत्यारोपण के आंकड़ों के बीच हम लगातार मधुमेह, ह्रदय रोगों, कैंसर, स्ट्रोक और किडनी के रोगियों का बोझ बढ़ते हुए भी देख रहे हैं। हैदराबाद के चर्चित लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद वर्मा ने कहा, शराब का सेवन हमारी दिनचर्या में बढ़ रहा है। खासतौर पर वेब सीरीज के इस युग में नई पीढ़ी में इसे एक तरह का शौक माना जा रहा है लेकिन यही शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने का पहला कारण है। हमारा यह एक मात्र ऐसा अंग है जो 60 से 70% तक क्षतिग्रस्त होने के बाद भी खुद विकसित हो सकता है।

ग्रोथ हार्मोन थेरेपी से एसाइटिस का इलाज
चंडीगढ़ (वीणा तिवारी)। पीजीआई के विशेषज्ञों ने ग्रोथ हार्मोनल थेरेपी से लिवर सिरोसिस के एसाइटिस यानी पेट में पानी भरने वाले मर्ज का इलाज करने में सफलता हासिल की है। हेपेटोलॉजी विभाग की ओर से लिवर एसाइटिस के 76 मरीजों पर किए गए इस प्रयोग का कारगर परिणाम सामने आया है। विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह के रिसर्च में जिन मरीजों को ग्रोथ हार्मोन थेरेपी दी गई, उनमें कुपोषण का स्तर तेजी से कम हुआ।

इससे उनको गुणवत्ता परक जीवन प्रदान करने में काफी मदद मिली। यह विश्व में अपने तरह का पहला शोध है जिसमें इस तकनीक का प्रयोग कर लिवर एसाइटिस के मरीजों को राहत देने में सफलता मिली है। इस शोध को अमेरिकन जनरल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने स्वीकृति दे दी है।

पहले और बाद में जांची गई स्थिति 
प्रो. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस शोध में इस मर्ज से ग्रस्त 76 मरीजों को शामिल किया गया। यह शोध 5 वर्षों में पूरा हुआ। इसमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में ज्यादा थी। शोध में शामिल 38-38 मरीजों को दो भागों में बांटा गया।

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