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आखिर क्यों जंग के मैदान में बदलती जा रही है पूरी दुनिया?

Fri, 25 Mar 2016 11:21 PM IST
दिनेश मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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तुर्की, पेरिस और अब ब्रसेल्स में खौफनाक आतंकी हमलों से दुनिया एक बार फिर सदमे में है। 2011 की अरब क्रांति के बाद से जिस तेजी से आतंकी संगठन अपना पांव पसार रहे हैं, उससे ये आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में आतंकी घटनाओं में और बढ़ोतरी ही होगी। दुनिया में हालात जिस तेजी से खराब हो रहे हैं, उससे अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष के नए क्षेत्र बन रहे हैं। यानी कुल मिलाकर दुनिया एक बार फिर जंग का मैदान बनती जा रही है। जिसमें अब तक हजारों लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं।
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अरब क्रांति के बाद माना जा रहा था कि दुनिया के कुछ क्षेत्रों में हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी, मगर सीरिया, इराक, ट्यूनीशिया, सूडान और मिस्र में आतंकियों के बढ़ते वर्चस्व ने इस उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उल्टे आतंकी संगठनों ने इन क्रांतियाें का फायदा उठाया है।

एक ओर जहां अल कायदा तो दूसरी ओर हाल के दिनों में तमाम आतंकी घटनाओं में शामिल रहा और दुनिया के लिए चुनौती बना इस्लामिक स्टेट अपने पांव तेजी से पसार रहा है। इसके अलावा नाइजीरिया में बोकोहराम और अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद से दोगुनी ताकत से तालिबान और लश्कर जैसे आतंकी संगठन तेजी से वापसी करने में जुटे हैं।
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आतंकवाद में 80 फीसदी का इजाफा

- फोटो : Getty Images
2012 के बाद सीरिया, इराक, यमन और लीबिया में हो रही लड़ाइयों में मरने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया 60 स्थानों पर 103 सशस्त्र संघर्षों का गवाह रहा है। जिनमें से 42 तो तकरीबन युद्ध जैसे हालात के कगार पर पहुंच गए थे। थिंक टैंक गेटवे हाउस में सीनियर फेलो अमित भंडारी कहते हैं, ‘आतंकवाद जिस तेजी से अपने पांव पसार रहा है, उससे खतरनाक स्थिति पैदा हो रही है। अफगानिस्तान हो या फिर दक्षिण चीन सागर या फिर मध्य पूर्व, सभी जगह हालात बिगड़ रहे हैं।

आईएस जैसे नए आतंकी संगठन सरकारों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में दुनिया को मिलजुलकर इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।’ सीरिया, इराक और यमन समेत पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका मौजूदा वक्त में दुनिया के सबसे खतरनाक क्षेत्र बन गए हैं। दुनिया का दूसरा सबसे खतरनाक क्षेत्र उप सहारा अफ्रीका के नाइजीरिया, दक्षिणी सूडान, सोमालिया और कांगो गणराज्य हैं, जहां लड़ाइयों में जान गंवाने वालों की संख्या में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। दुनिया का तीसरा सबसे प्रमुख संघर्ष क्षेत्र मध्य और दक्षिण एशिया है जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं। यहां अकेले 2012 में दस हजार लोग ऐसे ही संघर्षों में मारे गए थे।

इंस्टीटयूट ऑफ इकोनामिक पीस के साल 2015 के वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के मुताबिक आतंकवादी हमलों में अकेले 2014 में ही रिकॉर्ड 32,000 मौतें हुई थीं। 162 देशों के आंकड़ों पर आधारित इस सूचकांक में कहा गया है कि 2013 के मुकाबले 2014 में आतंकवाद में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है।
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