मधुमेह और हाई इंसुलिन भी अब कई तरह के कैंसर की वजह बन रहा है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के एक अध्ययन के मुताबिक ऐसे मरीजों में किडनी और अग्नाशय के कैंसर की संभावना ज्यादा होती है। मधुमेह और इंसुलिन की वजह से महिलाओं में स्तन और मलाशय कैंसर का भी खतरा रहता है।
साउथ एशियन फेडरेशन ऑफ एंडोकिन सोसायटी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ संजय कालरा का कहना है कि ब्लड ग्लूकोज में वृद्धि और कैंसर होने के बीच सीधा संबंध फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन दोनों में गहरा संबंध है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
मैक्स सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल के कैंसर रोग विभाग के चेयरमैन डॉ हरित चतुर्वेदी का कहना है कि देश में केवल 15 प्रतिशत कैंसर पीड़ितों को ही समय पर उपचार मिल पाता है। इसमें यदि सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दशक में कैंसर मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
डॉ चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार को देश में ज्यादा से ज्यादा डायग्नोस्टिक सेंटर का निर्माण करना चाहिए, ताकि जल्द कैंसर मरीजों की पहचान की जा सके। पहले और दूसरे स्तर पर कैंसर का पता लगने पर बेहतर परिणाम के साथ इलाज संभव है। डॉयग्नोस्टिक सेंटर बनाने पर अस्पताल की तुलना में महज 25 फीसदी खर्च आता है।