विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कई देशों ने स्तनपान की दर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अगर कार्यस्थल में स्तनपान को प्रोत्साहित और समर्थित किया जाए तो और भी अधिक प्रगति की जा सकती है। प्रत्येक वर्ष अगस्त के पहले सप्ताह को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिशु विकास के लिए स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और डब्ल्यूएचओ ने घोषणा की है कि इस वर्ष का विषय है ‘आओ काम पर स्तनपान कराएं’। वैश्विक स्तर पर स्तनपान दरों में प्रगति को बनाए रखने और सुधारने के लिए सभी कार्यस्थलों पर अधिक स्तनपान समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पिछले एक दशक में स्तनपान की दर में उल्लेखनीय 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब यह 48 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आइवरी कोस्ट, मार्शल आइलैंड्स, फिलीपींस, सोमालिया और वियतनाम जैसे देशों में स्तनपान दरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ ने 2030 तक वैश्विक लक्ष्य 70 प्रतिशत तक पहुंचाने का आह्वान किया है। इसके लिए कार्यस्थल नीतियों को अधिक परिवार-अनुकूल बनाने के लिए कहा है। इसके तहत भुगतान किए गए मातृत्व अवकाश, स्तनपान अवकाश और कार्यस्थल पर एक ऐसा कमरा शामिल हो जहां माताएं स्तनपान करा सकें।
बच्चे के लिए इसलिए जरूरी मां का दूध
एजेंसियों ने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती क्षणों से ही स्तनपान बच्चे के अस्तित्व और विकास के लिए आवश्यक है। यह शिशुओं को सामान्य संक्रामक रोगों से बचाता है और बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है, जिससे बच्चों को उनकी पूरी क्षमता तक बढ़ने और विकसित होने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पोषक तत्व मिलते हैं।
शिशु मृत्युदर में आती है कमीस्तन
पान से शिशु मृत्युदर में भी कमी आती है। जिन शिशुओं को स्तनपान नहीं कराया जाता उनके अपने पहले जन्मदिन तक पहुंचने से पहले ही मरने की संभावना स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में 14 गुना अधिक होती है।