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विश्व एड्स सम्मेलनः दवा के सहारे सामान्य और लंबी जिंदगी गुजार सकते हैं एड्स रोगी

Tue, 19 Jul 2016 04:23 AM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर/ डरबन
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जैसे हाई ब्लड प्रेशर की रोजाना एक गोली खाकर आधी दुनिया सामान्य जिंदगी बिना किसी परेशानी के गुजार रही हैं, ठीक उसी तरह एड्स रोगी भी एक दवा लेकर सामान्य जीवन आसानी से गुजार सकते हैं। एड्स के साथ जीवन अब इतना खतरनाक नहीं रहा जितना इस सदी के शुरू में था।
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अब रोगियों को मौत से बचाया जा रहा है। सन 2000 में दुनिया भर में एड्स से मरने वालों की गिनती 1.5 मिलियन थी जो अब घटकर 1.1 मिलियन रह गई है। विशेषज्ञ इसे एक बड़ी कामयाबी मान रहे हैं।

डरबन में इंटरनेशनल एड्स कांफ्रेंस का आगाज सोमवार को हुआ। एड्स पर काम कर रहे दुनियाभर से करीब 18,000 ग्लोबल लीडर, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता यहां जुटे हैं। सबकी आंखों में एड्स पर विजय का सपना है।
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संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव बन की मून ने यहां सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा इस महामारी के खिलाफ सारी दुनिया को जंग लड़नी है। ये जंग हथियारों से नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देकर जागरूकता से लड़ी जानी है। इसलिए देश हथियारों पर नही बल्कि दवाओं पर पैसा खर्च करें।

सदी के शुरू में एड्स रोगी की अधिकतम जिंदगी दस साल थी और उनका जीवन नर्क से बद्तर था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। दुनिया के 36.7 मिलियन एचआईवी ग्रस्त लोगों में करीब 17 मिलियन लोगों ये दवा नियमित रूप से ले रहे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैँ। दवाओं के नियमित इस्तेमाल के बाद एड्स रोगियों की मृत्यु दर में चौंकाने वाली कमी आई है। ये दवा दुनियाभर की सरकारें मुफ्त मुहैया करा रही हैं।

एड्स के प्रति जागरूकता का एक असर और दिखा है। सन 2000 में दुनिया में पांच लाख बच्चे एचआईवी संक्रमण के साथ जन्म लेते थे। अब इनकी संख्या घटकर केवल डेढ़ लाख रह गई है। लक्ष्य है कि सन 2020 तक यह संख्या घटकर 50,000 रह जाए। भारत में एचआईवी से ग्रस्त करीब 21 लाख मरीज हैं जिनमें 7 फीसदी बच्चे भी शामिल हैं।

इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी के अध्यक्ष क्रिस बेयर्र ने कहा ये बहुत संवेदनशील समय है। विज्ञान को अभी इस दिशा में बहुत काम करना है। देश की सरकारों को खुले दिल से एड्स रोगियों की मदद के लिए आगे आना होगा वर्ना ये आशाजनक स्थिति फिर कभी भी बदल सकती है क्योंकि एड्स अभी तक एक रहस्यपूर्ण बीमारी है। कई सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं।

एड्स रोगियों में दुनिया में नम्बर-3 है इंडिया
एड्स के सबसे ज्यादा मरीज साउथ अफ्रीका में हैं। यहां एचआईवी ग्रस्त लोगों की दुनिया में सबसे ज्यादा 56 लाख रोगी हैं। दूसरे नंबर पर तंजानिया है जहां एचआईवी संक्रमित रोगियों की संख्या 32 लाख है। तीसरे नंबर पर भारत है जहां कोई 21 लाख लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं।
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