कांग्रेस कार्यसमिति ने पहली बार सर्वसम्मति से पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सामने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने की पेशकश की है। राहुल ने भी कार्यसमिति की बैठक में वरिष्ठ नेताओं के आग्रह पर देश के सामने खड़ी चुनौतियों और परिस्थितियों में सोच का खतरा बताकर किसी भी जिम्मेदारी को स्वीकार करने की मंशा जताई है।
पार्टी की कमान फिलहाल सोनिया गांधी के हाथों में ही रहेगी। पार्टी के संगठनात्मक चुनाव पूरे न होने के चलते कार्यसमिति ने सोनिया का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। पार्टी को चुनाव आयोग में 31 दिसंबर तक इसकी जानकारी देनी थी।
पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल की ताजपोशी पर कार्यसमिति कभी फैसला ले सकती है। राहुल को अध्यक्ष बनाने की बात पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने उठाई और डॉ. मनमोहन सिंह के अनुमोदन के साथ पूरी कार्यसमिति ने अपनी इच्छा जताई।
एंटनी ने मीडिया से कहा कि राहुल को अध्यक्ष बनाने की बात उठती रही है लेकिन पहली बार पार्टी की सर्वोच्च समिति ने सर्वसम्मति से ऐसा फैसला लेकर अपनी भावना से उन्हें अवगत कराया है।
कार्यसमिति का मानना है कि राहुल गांधी सक्रिय रूप से पार्टी की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे हैं।
लिहाजा उन्हें पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए। कार्यसमिति ने कहा कि मोदी सरकार, संघ और भाजपा की लोक विरोधी नीतियों, सांप्रदायिकता और देश में शांति व सौहार्द का बिगड़ते माहौल को देखते हुए राहुल नेतृत्व प्रदान करें।
उन्होंने बताया कि कार्यसमिति के इस फैसले की जानकारी सोनिया गांधी को दी जाएगी। वह ही अंतिम फैसला लेंगी। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि चुनने के लिए कार्यसमिति अधिकृत है। किसी भी समय यह निर्णय लिया जा सकता है। राहुल के अध्यक्ष बनने पर सोनिया की भूमिका को लेकर रणदीप ने कहा कि यह फैसला उसी वक्त होगा।