कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में लोगों का जीवन पटरी से उतर गया है। महामारी की तबाही से अर्थव्यवस्थाएं तो चौपट हुई ही हैं, इसका खासा असर आमजन पर भी पड़ा है। कोरोना के चलते दुनियाभर में वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करना) का चलन बढ़ गया है। इसी बीच एक शाेध आया है, उसके अनुसार लंबे समय तक बैठे रहने से माैत का खतरा बढ़ रहा है।
महामारी के चलते तमाम कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा प्रदान की है। लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर लोगों ने घरों से ही काम किया। हालांकि, हालात के सामान्य होने के बाद से अब धीरे-धीरे ऑफिस खुलने लगे हैं। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक ऐसा शोध सामने आया है, जिससे लोग थोड़ा परेशान हो सकते हैं।
वर्क फ्रॉम होम की वजह से लोग एक ही जगह लगातार बैठकर काम कर रहे हैं, इस दौरान वह बहुत ही कम बार उठ पाते हैं। ऐसे में उनकी सिटिंग (बैठने) की अवधि बढ़ गई है। जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है।
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के शोध के मुताबिक, दिन भर निष्क्रिय रहने वाले लोगों में युवा अवस्था में ही मृत्यु होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, अगर व्यक्ति थोड़ी बहुत भी मूवमेंट करता है तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
50 हजार पर किया शोध
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यूरोप और अमेरिका में रहने वाले लगभग 50 हजार लोगों पर शोध करने के बाद इन नतीजों को प्रकाशित किया है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि यदि व्यक्ति काम करने के दौरान अगर 10 मिनट भी हल्का व्यायाम या तेजी से वॉक करता है, तो लंबी सिटिंग से होने वाले शारीरिक दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नतीजों में पाया गया कि जो लोग हर दिन 35 मिनट व्यायाम करते हैं, उन्हें सिटिंग से होने वाले दुष्प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान खुद को नियमित अंतराल पर आराम देते रहना चाहिए, क्योंकि इससे दुष्प्रभावों पर लगाम लग सकती है।