फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घर छोड़ मुस्लिम व्यक्ति के साथ जाने वाली महिला ने अदालत से कहा, पढ़ाई के लिए उठाया था कदम

Mon, 04 Jan 2021 10:11 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

पिछले साल नवंबर में घर छोड़कर जाने वाली युवती ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि घर पर ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाने के कारण वह एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ चली गई थी, लेकिन अब वह अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान इस पर गौर किया कि युगल जोड़े का विवाह नहीं हुआ था, हालांकि ‘निकाहनामा’ तैयार किया गया था। इस युवती के माता पिता ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे आगे पढ़ाई करने की उसकी इच्छा का सम्मान करेंगे और घर में अनुकूल माहौल भी बनाएंगे।

विज्ञापन


इसके अलावा, उन्होंने अदालत को यह आश्वासन भी दिया कि इस सारी घटनाओं के लिए वे अपनी बेटी को डांटेंगे नहीं और न ही ताने देंगे और वे उसकी इच्छा के खिलाफ किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने के लिए उसे मजबूर भी नहीं करेंगे। पीठ ने जब शुरू में इस युवती से बातचीत की तो उसने कहा कि वह अपने परिवार में वापस जाने को तैयार नहीं है और बाद में उनसे बात करेगी। इस पर पीठ ने कहा कि अगर वह नहीं जाना चाहती है, तो हम उसे जाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।


हाल जानने हर दूसरे दिन जाएगी महिला कांस्टेबल
माता-पिता ने अनुरोध किया था कि उनकी बेटी को प्रदान किए गए आवास में रहने दिया जाए। लेकिन पीठ ने इस अनुरोध को ठुकराते हुए कहा कि यदि वह जाना चाहती है तो हम कैसे उसे नारी निकेतन तक बांध कर रख सकते हैं? वह वयस्क है और हम उसे वहां रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। हालांकि सुनवाई के दौरान अपने रोते हुए माता-पिता से बातचीत करने के बाद वह घर लौटने के लिए राजी हो गई। इसके बाद अदालत ने उसके पिता को दिन के समय उसे राष्ट्रीय राजधानी के नारी निकेतन से लाने की अनुमति दी जहां वह 26 दिसंबर से रह रही थी।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि उसे क्षेत्र के बीट कांस्टेबल के मोबाइल फोन नंबर उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि जरूरत पड़ने पर वह उनसे संपर्क कर सके और पहले दो सप्ताह के दौरान हर दूसरे दिन एक महिला कांस्टेबल उसका हाल-चाल जानने के लिए उसके घर जाएगी। अदालत ने इसके साथ ही युवती के पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया। युवती के पिता ने इस याचिका में अदालत से अनुरोध किया था कि सात नवंबर, 2020 से लापता उसकी बेटी को पेश करने का निर्देश दिया जाए। परिवार ने दावा किया था कि उसे एक ‘बांग्लादेशी’ व्यक्ति जबरदस्ती अपने साथ ले गया है।

महिला की मां ने लगाया ब्रेनवॉश करने का आरोप
सुनवाई के दौरान महिला की मां ने कहा कि उस व्यक्ति ने उसका ‘ब्रेनवॉश’ किया और उसे ले गया। वह बांग्लादेशी है और भारत का नहीं है। वापस आओ, वह तुम्हें बेच देगा। अदालत ने अपने आदेश में इस तथ्य का जिक्र किया कि इस साल गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई पूरी कर चुकी यह युवती प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती है ओर उसने परिवार में लगातार होने वाली नोक-झोंक के कारण घर छोड़ दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि युवती ने बताया कि वह उसके साथ (उस व्यक्ति) एक वकील के पास गई थी जिसे 10,000 रुपये दिए गए और एक काजी को बुलाने के बाद उसने निकाहनामा तैयार किया। उसने यह नहीं बताया कि उसका इस्लाम में धर्मांतरण हुआ है। अब यह देखना होगा कि क्या इन परिस्थितियों में सिर्फ निकाहनामा तैयार करना ही मुस्लिम विवाह माना जाएगा। इस मामले में सुनवाई की पिछली तारीख पर युवती के परिवार के सदस्यों को पुलिस की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें