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हाइपोथायरायडिज्म से जूझ रहीं महिलाएं, जीवनभर दवा लेने का मिथक तोड़ना चुनौती

Thu, 12 Mar 2020 11:46 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डॉ. स्वप्ना वेमुला - फोटो : Amar Ujala
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बदलती जीवनशैली कई रोगों का कारण बन रही है। ऐसी ही एक बीमारी है थायरॉइड। हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझ रही महिलाओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। सामान्य रूप से 25 से 45 की उम्र वाली महिलाओं में प्रत्येक आठ में से एक महिला इस रोग से ग्रस्त है।

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देश के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में से एक एचकेईएसएचएमसीजी मेडिकल कॉलेज गुलबर्गा कर्नाटक की छात्रा रह चुकीं डॉ. स्वप्ना वेमुला का कहना है कि हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि थायरोक्सिन उत्पादन की कमी के कारण निष्क्रिय हो जाती है। मैं थायरॉइड के इलाज के लिए जीवनभर दवा लेने के मिथक को तोड़ना चाहती हूं।

क्या है इलाज

सिंथेटिक थाइरोक्सिन शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले थायरोक्सिन को उत्पन्न होने और बढ़ने से रोकता है। इसलिए जरूरी है कि होम्योपैथी का इलाज लेकर अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं।

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क्या हैं कारण 

  • खाने में आयोडीन की मात्रा कम होना
  • ऑटोइन्म्यून की स्थिति पैदा होना
  • गर्भावस्था के दौरान हार्मोन्स का असंतुलन
  • पीयूष (पिट्यूटरी) ग्रंथि में विकार
  • खराब जीवनशैली के कारण पेट में सूजन जैसी तकलीफें
  • ठीक तरह से नींद ना लेना या नींद पूरी ना होना

क्या हैं लक्षण

  • वजन बढ़ना
  • बाल और त्वचा में रूखापन
  • थकान होना
  • कब्ज या अपच होना
  • बालों का झड़ना
  • नाखून का नाजुक होना या टूटना
  • ठंड के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना

जीवनशैली में क्या बदलाव लाएं

  • कोल्ड प्रेस्ड ऑयल या प्राकृतिक तरीके से निकाले गए तेल का उपयोग करना।
  • खाने में आयोडीनयुक्त नमक का इस्तेमाल करना।
  • आयोडीन से भरपूर खाद्य पदार्थ: केला, गाजर, चुकंदर, स्ट्रॉबेरी का सेवन।
  • कद्दू और सूरजमुखी के बीज, बादाम को भोजन में शामिल करना।
  • पारंपरिक भारतीय भोजन करना।
  • पर्याप्त नींद लेना।
  • थायरॉयड सुबह के समय अधिक सक्रिय होता है ऐसे में सुबह की दिनचर्या या मॉर्निंग रूटीन का विशेष ख्याल रखना।
  • सुबह योग और प्राणायाम के जरिए तनाव में कमी लाना।
  • उज्जाई श्वास लेना बेहतर रहेगा।
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शरीर की इन बातों को भी समझें और ध्यान रखें

  • थायरॉइड में सुधार के लिए आंतों के स्वस्थ रहने का बहुत महत्व है और इसके प्रभाव को भी समझा जाना चाहिए। 
  • फर्मेंटेड (किण्वित) भोजन और नियमित डिटाक्सिफिकेशन (विषहरण) भी उपयोगी हो सकता है।
  • थायरॉइड की समस्या से लड़ने के लिए हमेशा अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा खराब बैक्टीरिया से अधिक होने चाहिए।
  • खराब मल त्याग आपकी मानसिक स्थिति को भी दर्शाता है, ऐसे में ठीक ढंग से पेट का साफ होना भी जरूरी बात है।
  • सहजन या मोरिंगा के पत्ते इसमें फायदेमंद होते हैं।
  • खाना पकाने की प्रक्रिया और जैविक खाद से उत्पन्न खाद्य पदार्थ भी महत्वपूर्ण है।
  • दवा प्राथमिकता नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना ज्यादा अहम है।
  • थायरॉइड शरीर के अंगों की चयापचय गतिविधि को प्रभावित करता है, इसलिए इसका ठीक ढंग से प्रबंधन करना भी महत्वपूर्ण है।
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