डॉ. स्वप्ना वेमुला
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बदलती जीवनशैली कई रोगों का कारण बन रही है। ऐसी ही एक बीमारी है थायरॉइड। हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझ रही महिलाओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। सामान्य रूप से 25 से 45 की उम्र वाली महिलाओं में प्रत्येक आठ में से एक महिला इस रोग से ग्रस्त है।
देश के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में से एक एचकेईएसएचएमसीजी मेडिकल कॉलेज गुलबर्गा कर्नाटक की छात्रा रह चुकीं डॉ. स्वप्ना वेमुला का कहना है कि हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि थायरोक्सिन उत्पादन की कमी के कारण निष्क्रिय हो जाती है। मैं थायरॉइड के इलाज के लिए जीवनभर दवा लेने के मिथक को तोड़ना चाहती हूं।
क्या है इलाज
सिंथेटिक थाइरोक्सिन शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले थायरोक्सिन को उत्पन्न होने और बढ़ने से रोकता है। इसलिए जरूरी है कि होम्योपैथी का इलाज लेकर अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं।