आज पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2025 हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर सेक्टर में आज महिलाओं की भागीदारी तेजी के साथ बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। भारतीय रेलवे में भी महिला कर्मचारियों की संख्या में दिनों दिन इजाफा होते दिखाई दे रहा है।
पिछले 10 वर्षों में देश में ट्रेन चलाने वाली महिला लोको पायलटों की संख्या में लगभग पांच गुना वृद्धि हुई है। ये बढोत्तरी इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी को दिखाता हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार,भारतीय रेलवे में 2024 तक करीब 1,828 महिला लोको पायलट काम कर रही हैं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या मात्र 371 थी।
अभी भारतीय रेलवे में 1 लाख महिला कर्मचारी हैं, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 8.2 प्रतिशत हैं। लेकिन आज महिलाओं ने लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, ट्रैकमैन, सिग्नल मेंटेनेंस, गार्ड और गैंगमैन जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है। रेलवे में पिछले 10 वर्षों में महिला स्टेशन मास्टरों की संख्या भी लगभग पांच गुना बढ़कर 1,828 हो गई है।
महिला लोको पायलट की संख्या में पिछले 10 वर्षों में आया यह उछाल अलग-अलग राज्यों से देखा गया है। उत्तर प्रदेश से महिला लोको पायलट की यह संख्या 36 से बढ़कर 222 हो गई है। इसी तरह तेलंगाना से महिला लोको पायलट 13 से बढ़कर 196 और तमिलनाडु से 39 से बढ़कर 180 हो गई हैं।
गौरतलब है कि,हर साल 8 मार्च को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने और उनकी सराहना करने का अवसर है. इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में योगदान के उत्सव के तौर पर देखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1909 में हुई थी, और इसे औपचारिक मान्यता 1975 में मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक थीम के साथ मनाना शुरू किया. इस बार का थीम 'एक्सलरेट एक्शन' है।