कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में महिला आरक्षण को लेकर पार्टी की सोच और देश में सांविधानिक बदलावों की जरूरतों पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में बदलावों की मंशा संघीय ढांचे को कमजोर करना नहीं होनी चाहिए। थरूर ने और किन बातों पर जोर दिया? जानिए उन्होंने और क्या कहा?
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शनिवार को महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह संशोधन संघीय ढांचे को कमजोर करने वाला राजनीतिक उपकरण नहीं होना चाहिए। थरूर ने संसद में जीवंत और सार्थक बहस न होने के प्रति आगाह भी किया। उन्होंने एक्स पर लिखे एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के लिए विशेष सत्र बुला रही है। इसका उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले परिसीमन पर नजर रखना है। कांग्रेस एक तिहाई महिला आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, यह आरक्षण समावेशी और निष्पक्ष होना चाहिए।
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महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस पार्टी ने 2013 में क्या किया?
गौरतलब है कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की शुक्रवार को बैठक हुई थी। इसमें महिला आरक्षण कानून पर पार्टी का रुख तय किया गया। थरूर ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा 33 फीसदी महिला आरक्षण का भी समर्थन किया है। उन्होंने यूपीए के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा, कांग्रेस पार्टी ने साल 2013 में ही राज्यसभा में बिल पारित कराया था। उन्होंने भावी बदलावों के प्रति आगाह करते हुए कहा, वर्तमान सरकार का तरीका गंभीर चिंताएं पैदा करता है।
सरकार की मंशा पर सवाल
सीडब्ल्यूसी ने विपक्षी दलों से परामर्श किए बिना सरकार के एकतरफा और अपारदर्शी कदम की निंदा की। पार्टी ने चेतावनी दी कि विधेयक के साथ परिसीमन अभ्यास जल्दबाजी में करने के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। यह राज्यों के लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। खासकर दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में इसका असर होगा। थरूर ने कहा कि कई कांग्रेस नेताओं ने उजागर किया कि सरकार ने मूल रूप से कार्यान्वयन में देरी की थी।
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कांग्रेस की प्रतिबद्धता और आरोप
कांग्रेस ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास असांविधानिक है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस पर चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है। सीडब्ल्यूसी बैठक में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की बात कही। यह बैठक गुरुवार से शनिवार तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए संयुक्त रणनीति बनाने हेतु होगी।