देवबंदी और बरेलवी मसलक के विवाद पर चंद दिन की खामोशी के बाद अब बरेली में नई शुरुआत महिलाओं की कांफ्रेंस के जरिए की गई। आमतौर पर महिलाओं की मजलिसों और जलसों में दीन पर चर्चा होती है या बुजुर्गों की शान में तकरीरें और नसीहतों की बातें हुआ करती हैं। यह पहला मौका है जब तिलियापुर (सीबीगंज) में मसलके आला हजरत कांफ्रेंस के बहाने महिला आलिमों ने सीधे-सीधे देवबंदी और वहाबियों को निशाने पर रखा।
इस कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि आलिमा फाजिला शाइस्ता नूरी (बहेड़ी) ने कहा कि औरतों को परदे में रहना जरूरी है। परदा औरत को हर बुरी नजर से बचाता है और उसकी हिफाजत करता है। उन्होंने कहा कि परदा कोई शर्म या जुल्म की बात नहीं बल्कि इस्लाम में परदा औरत के लिए एक फख्र की बात है। साथ ही गुस्ताखे रसूल से दूर रहने की भी बात कही।
आलिमा फातिमा अजहरी तिलियापुरी ने इल्म की फजीलत और गुस्ताखे रसूल के बारे में बयान किया। उन्होंने कहा कि देवबंदी वहाबी से किसी भी कीमत पर इत्तेहाद नहीं हो सकता। न ही उनसे दोस्ती हो सकती है और न ही मिलना जुलना। इल्म सीखना हर मर्द व औरत पर फर्ज है। आलिमा शाहीन रामपुरी ने मसलके आला हजरत पर कायम रहने की तबलीग की। आलिमा सादिया फातिमा रामपुरी ने वजू, तरन्नुम रामपूरी ने नमाज के बारे में लोगों को बताया।
इस दौरान शायरा हिना ने हुजूर की शान में नातिया कलाम पेश किया। इसके अलावा आलिमा आयशा तिलियापुरी, आलिमा साजिदा तिलियापुरी, आलिमा अनम आदि ने अलग-अलग विषय पर तकरीर की। जलसे का संयोजन मोहम्मद बख्तियार खां ने किया। सहयोग मोहम्मद अहमद, सलमान रजा खां आदि का रहा।