दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है, लेकिन सरकार कोई काम नहीं कर रही है। इसका परिणाम है कि दिल्ली के लोगों में सांस, दमे के साथ-साथ गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रही है, लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि लापरवाही का आलम यह है कि दिल्ली के 971 प्रदूषण केंद्रों पर केवल 28 इंस्पेक्टरों की भर्ती की मंजूरी दी गई थी। हद तो तब हो गई जब इन 28 पदों में से भी केवल आठ पर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। उन्होंने कहा कि इसी से समझ आ जाता है कि केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार के लिए दिल्ली के लोगों का स्वास्थ्य किस प्राथमिकता में आता है।
दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने शनिवार को एक वाकथॉन मार्च का नेतृ्त्व करते हुए कहा कि जीवन जीने के लिए ताजी हवा पर सभी का अधिकार है, लेकिन लोगों को साफ पानी तक नहीं मिल रहा है। अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान के अनुसार सांस लेने से प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हृदयघात के मामले भी सर्दियों में ज्यादा प्रदूषण के कारण अधिक बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार को इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने केन्द्र और दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों सरकारें दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। कुल प्रदूषण में 30 प्रतिशत केवल वाहनों से होता है। सार्वजनिक वाहनों के उपयोग से इसमें कमी आती है। लेकिन पांच साल पहले कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार 5223 बसें डीटीसी के बेड़े में छोड़कर गई थी जो कम होकर केवल 3951 बसें रह गई हैं।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि मेट्रो फेस तीन साल और और फेस चार का प्रोजेक्ट एक साल से अधर में लटका हुआ है।उन्होंने केन्द्र सरकार के उस निर्णय को गलत बताया जिसमें सरकारी कालोनियों में 13000 पेड़ों को काटने के नोटिस दिए थे। उन्होंने कहा कि पेड़ किसी भी शहर की जीवन रेखा है और इतनी बड़ी संख्या में पेड़ गिराने के निर्णय जो कि वापस ले लिया गया था, वह सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।