देश में गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने और स्वच्छता के लिए जोरशोर से मुहिम चल रही है और मैला ढोने जैसी बुराई को पूरी तरह मिटाने का दावा किया जाता है। लेकिन सांसद का गोद लिया एक गांव सरकारी दावों को मुंह चिढ़ा रहा है। यह गांव है ढखौरा जिसे सांसद ग्राम योजना के तहत धौरहरा की भाजपा सांसद रेखा वर्मा ने गोद लिया है। गांव में एक महिला रोज कई घरों का मैला ढोती है।
दो मजरे के गांव में पांच सौ से अधिक घरों में शौचालय नहीं हैं। करीब 25 घरों में शुष्क शौचालय हैं, जिनका मैला एक महिला उठाकर ले जाती है। सांसद को नहीं मालूम कि शर्मसार करने वाली मैला ढोने की कुप्रथा उनके गांव में अभी जारी है।
सफाई के बदले मिलता है अनाज
बेवा रामदेवी मैला ढोने का काम करती हैं। उसके पति की मौत हो चुकी है। दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो गई। तीन बेटे हैं, जिनमें से दो विवाहित हैं। बेटे सुअर पालन और मजदूरी के काम में लगे हैं। इनके पास जमीन भी नहीं है। गांव निवासी सुरेश पाल सिंह, नीरज कुमार और बृजपाल बताते हैं कि मैला ढोने वाली राम देवी को मजदूरी के नाम पर छह किलो अनाज छमाही मिलता है। मैला ढोने वाले घर से उसे गेहूं और धान की कटाई के समय ही अनाज दिया जाता है।
बंद कराऊंगी मैला ढोने की प्रथा
गांव में अब भी कुछ लोग खुले में शौच जाते हैं। 20 से 25 घरों में महिलाओं और बच्चों की सुविधा के लिए शुष्क शौचालय बनवा लिए हैं। जिनका मैला एक महिला ढोती है। इसके समाधान के लिए ऐसे घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। जल्द ही शौचालय के निर्माण कराकर गांव से मैला ढोने की प्रथा को बंद कराऊंगी। साथ ही गांव को खुले में शौच मुक्त कराना भी प्राथमिकता में है।
-किरन सिंह, प्रधान
कुप्रथा की मुझे जानकारी नहीं
ढखौरा गांव को जब गोद लिया था, तब सपा की सरकार थी। सपा की सरकार में योजनाएं नहीं मिल सकीं, जिससे निर्माण कार्य शुरू होने में देरी हुई। वर्तमान में ओवरहेड टैंक और सड़क निर्माण हो रहा है। गांव में मैला ढोने की प्रथा की जानकारी नहीं थी। यदि ऐसा है तो इस कुप्रथा से गांव को मुक्त कराया जाएगा। साथ ही हर घर में शौचालय बनवाकर खुले में गांव को खुले में शौच मुक्त कराया जाएगा।
-रेखा वर्मा, सांसद-धौरहरा क्षेत्र