उत्तराखंड की महिलाएं घर और बाहर का सारा काम करती हैं। वे घर के साथ जंगल व खेती भी देखती हैं। इसीलिए जैसे ही उन्हें टूटी सड़क, गंदा पानी, पीने के पानी की पाइप टूटने, खनन, जंगल में आग, अवैध लकड़ी की कटाई आदि की जानकारी मिलती है, वे स्वयं या बच्चों के माध्यम से स्कूल तक पहुंचा देती हैं।
इसकी सूचना बनकार संबंधित विभागों व अधिकारियों को भेज दी जाती थी। सूचना सही समय पर पहुंचने पर विभाग के कर्मी आकर दिक्कतों को दूर करने में जुट जाते। पहले दिक्कतों की सूचना हफ्तों या महीनों तक विभागों तक नहीं पहुंच पाती थी। पहाड़ी इलाका होने के चलते कर्मियां का प्रतिदिन हर जगह पहुंचना मुश्किल होता था।