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Maharashtra: महिला का हत्यारोपी दो साल बाद बरी, जांच में खामियां मिलने पर अदालत ने पुलिस को लगाई फटकार

Fri, 26 Sep 2025 06:17 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे

सार

ठाणे जिले के दिवा (पूर्व) में महिला ज्योति सोनकर (19) की हत्या और  किरण खंडारे (21) पर हमले के मामले में आरोपी नागेश बालू रूपवते के अपराध को उचित संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। कोर्ट ने मामले की जांच में लापरवाही बरतने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। 
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कोर्ट ने दिया आदेश (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ठाणे की एक अदालत ने 2023 में एक महिला की चाकू मारकर हत्या करने और उसकी दोस्त की हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच में लापरवाही बरतने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं सका। 
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसबी अग्रवाल की ओर से सुनाए गए फैसले में कहा गया कि ठाणे जिले के दिवा (पूर्व) में महिला ज्योति सोनकर (19) की हत्या और  किरण खंडारे (21) पर हमले के मामले में आरोपी नागेश बालू रूपवते के अपराध को उचित संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका।

अभियोजन पक्ष के अनुसार ज्योति सोनकर और किरण खंडारे साथ रह रहे थे और एक ब्यूटी पार्लर चला रहे थे। 15-16 मई, 2023 की रात दिवा (पूर्व) स्थित एक इमारत के फ्लैट में खंडारे ने अपने पति और आरोपी नागेश बालू रूपवते के साथ रहने से इनकार कर दिया और सोनकर के साथ रहने की बात कही। इसके बाद दोनों में विवाद हुआ। मामले में रूपवते पर धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आरोप लगाए गए थे।
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अदालत ने मुंब्रा पुलिस को मामले को संभालने में लापरवाही बरतने पर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जब चाकू मारने की घटना के तुरंत बाद घायल पीड़िता खंडारे ने स्वयं कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपराध के बारे में सचेत कर दिया था तो आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज करने की क्या आवश्यकता थी? पुलिस के पास अपराध (हत्या और हत्या के प्रयास) के साथ-साथ घायल गवाह से आरोपी के बारे में सारी जानकारी थी।  इसके अलावा प्राथमिकी 16 मई को 15:57 बजे दर्ज की गई, जो कि घटना के 12 घंटे से अधिक समय बाद हुआ और आरोपी को 21:00 बजे गिरफ्तार किया गया, जो 18 घंटे बाद दर्ज की गई।

न्यायाधीश ने कहा कि ये सभी पहलू निश्चित रूप से इस जघन्य अपराध में अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी की उत्पत्ति के संबंध में उचित संदेह पैदा करते हैं। एक मुखबिर ने अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार गवाही दी थी और एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन एडीआर दर्ज करने, एफआईआर दर्ज करने में देरी करने और आरोपी की देरी से गिरफ्तारी के संबंध में किसी भी संदेह को उसके द्वारा स्पष्ट नहीं किया गया।

अदालत ने कहा कि मुख्य साक्ष्य चाकू के संबंध में अदालत को विरोधाभासी गवाही मिली। गवाह मनोज गुंजाल ने कहा कि चाकू और मोबाइल फोन उस शयनकक्ष में मिले थे। पुलिस ने उनकी मौजूदगी में उसे जब्त किया था। जबकि अभियोजन पक्ष के अनुसार चाकू चार दिन बाद जब्त किया गया था। इसलिए साक्ष्य का यह हिस्सा भी विश्वसनीय नहीं है।

रूपवते को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के बयान में खामियों को देखते हुए जिसमें पूरी तरह से उदासीन जांच और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री को दर्शाया गया है, यह नहीं कहा जा सकता कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित कर दिया है।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि रूपवते, अपनी पत्नी और दोस्त के साथ काम से घर आया और अपनी पत्नी से झगड़ा शुरू कर दिया क्योंकि वह उसके साथ रहने को तैयार नहीं थी। बहस के दौरान, उसने कथित तौर पर चाकू निकाला और अपनी पत्नी खंडारे की गर्दन, पेट और अंगों पर वार किया। जब सोनकर ने अपनी दोस्त को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया तो रूपवते ने कथित तौर पर उस पर कई बार चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि यह मौत हत्या थी, जो कई बार चाकू से किए गए घावों के कारण रक्तस्राव और सदमे के कारण हुई थी। हालांकि अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष खंडारे को लगी चोटों के बारे में कोई भी मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। इसके अलावा रूपवते द्वारा सोनकर पर हमला करते देखने के बारे में उसकी गवाही को बचाव पक्ष ने पुलिस बयान में एक चूक के रूप में स्थापित किया, जिससे उसकी विश्वसनीयता कमजोर हुई। 
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