मुंबई में दिल को छू लेने वाली खबर सामने आयी है। खबर यह है कि मुंबई के एक दंपत्ति से उसकी बेटी को 1976 यानि 41 साल पहले निलाक्षी एलिजाबेथ जोरेन्दल स्वीडिश पैरेंट्स ने गोद लिया था। बेटी जब बड़ी हुई तो उसे अपने असली मां के बारे में पता चला कि वह मुंबई में हैं, जिसके बाद वह पिछले 27 साल (1990) से अपनी मां को खोजने के लिए आ रही थी लेकिन उसे हर बार निराशा ही हाथ लग रही थी।
महिला जोरेन्दल एक स्वीडिश प्रेमी युगल द्वारा 3 साल की उम्र में मुंबई से अपनाई गई थी। अब उसकी उम्र 44 साल है। जानकारी के मुताबिक वह पुणे के गैर सरकारी संगठन 'अगेंस्ट चाइल्ड ट्रॅफिकिंग' की सहायता से अपनी मां को खोजने में सफल हुई हैं।
बीते शनिवार को यवतलाम के सरकारी अस्पताल में इन दोनों मां- बेटी का इमोशनल मिलन हुआ। संगठन की प्रमुख अंजली पवार ने बताया कि दोनों एक- दूसरे से मिलने पर आंसुओं से सराबोर हो गयी। इसके पहले महिला अपनी मां को खोजने के लिए स्वीडन से भारत का दौरा 6 बार कर चुकी थी। वह पुणे के निकट केडगांव में पैदा हुई थी। महिला, जोरेन्दल के पिता किसान थे, जिन्होंने 1973 में खुदकुशी कर ली थी।