सार
मुंबई के एक आईटी प्रोफेशनल पर उनकी महिला वकील ने शादी का भरोसा दिलाकर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया। तलाक केस के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, लेकिन पति-पत्नी के रिश्ते सुधरते देख वकील ने मुकदमा दर्ज करवाया।
गए थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी, कुछ ऐसा ही हुआ लंदन में काम करने वाले आईटी प्रोफेशनल के साथ। तलाक के लिए चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान उस शख्स और उसकी वकील के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। लेकिन अब पति और पत्नी के बीच रिश्ते सुधारने के आसार लगने लगे तो महिला वकील को यह बात नागवार गुजरी और उसने उस व्यक्ति के खिलाफ शादी का भरोसा दिलाकर यौन शोषण का आरोप लगा मुकदम दर्ज करा दिया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद नए संकट से राहत के लिए उस व्यक्ति ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां से राहत नहीं मिलने पर उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जस्टिस बी वी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने आईटी प्रोफेशनल को राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी।
आरोप : और भी दर्ज कराई हैं शिकायतें
सुनवाई के दौरान, आईटी प्रोफेशनल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने यह आरोप लगाया कि महिला वकील ने और लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा रखी है। तलाक की कार्यवाही पिछले तीन साल से चल रही है। अब पति और पत्नी के बीच रिश्ते सुधरने लगे हैं। इस आशंका के बाद महिला वकील ने मुकदमा दर्ज करा दिया।
जज ने कहा-आप तो वकील हैं, कानून पता होना चाहिए
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने महिला वकील (शिकायतकर्ता) से कहा कि आपको कानून पता होना चाहिए। उन्होंने कहा, आप कोई साधारण इंसान नहीं हैं बल्कि वकील हैं, जिसे कानून पता होता है। यह जानते हुए कि तलाक की कार्यवाही चल रही है तो शादी नहीं हो सकती। पीठ ने मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 12 दिसंबर की तारीख मुकरे की है।