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UP: मिशन शक्ति केंद्र की प्रभारी निरीक्षक होंगी महिला इंस्पेक्टर, केंद्र पर तैनात होंगे 22 पुलिसकर्मी

Wed, 24 Sep 2025 01:57 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

महिला अपराधों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए यूपी में मिशन शक्ति केंद्र खोले जा रहे हैं। यह केंद्र महिलाओं के आपराधिक मुद्दों पर नजर रखेंगे। दो हफ्ते के अंदर प्रदेश के सभी जिलों में इन केंद्रों को खोलने की तैयारी है। 
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स्कूटी रैली में शामिल महिला पुलिसकर्मी। स्रोत- पुलिस विभाग
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विस्तार
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प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।  इसके साथ ही मिशन शक्ति केंद्र को लेकर गाइडलाइन भी जारी की गयी है। ये सभी केंद्र पुलिस चौकियों की तरह कार्य करेंगे और महिला अपराधों से जुड़े मामलों की विवेचना भी करेंगे। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मिशन शक्ति केंद्र में एक प्रभारी निरीक्षक/उपनिरीक्षक (प्राथमिकता महिला अधिकारी), 1 से 4 उपनिरीक्षक, 4 से 15 आरक्षी (जिनमें 50 प्रतिशत महिलाएं), 1 से 2 महिला होमगार्ड तथा आवश्यकता पड़ने पर परामर्शदाताओं की नियुक्ति के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि सभी केंद्रों पर कर्मियों को 3 से 5 वर्ष की अवधि तक तैनात रखा जाएगा और प्रशिक्षित कर्मियों के स्थानांतरण का प्रावधान भी होगा।

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गाइडलाइन में थानों के प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि मिशन शक्ति केन्द्र के लिए एक अलग कक्ष, कम्प्यूटर, अभिलेख, स्टेशनरी, महिला शौचालय और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाए।

मिशन शक्ति केन्द्र की जिम्मेदारी

  • महिला हेल्प डेस्क की ड्यूटी और कार्यवाही का रोस्टर तैयार कर समय पर फॉलोअप करना।
  • एंटी रोमियो स्क्वॉड्स और महिला बीट योजना का नियमित क्रियान्वयन और पर्यवेक्षण करना।
  • महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित एफआईआर, विवेचनाओं और अभियुक्तों के खिलाफ निवारक कार्यवाहियों का समानांतर रिकॉर्ड रखना।
  • पीड़िताओं को काउंसिलिंग, कानूनी सहायता, पुनर्वास और क्षतिपूर्ति जैसी सेवाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर, डीएलएसए, जिला प्रोबेशन अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, बाल कल्याण समिति और फैमिली कोर्ट आदि से समन्वय स्थापित करना।
  • संवेदनशील मामलों में समयबद्ध चिकित्सा जांच और दबिश सुनिश्चित करना।
  • पलायन संबंधी प्रकरणों  और झूठे आरोपों वाले मामलों में अनिवार्य काउंसिलिंग करना।
  • महिला सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम नियमित आयोजित करना।
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