केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जांच दल द्वारा किए गए निरंतर और सावधानीपूर्वक प्रयासों के परिणामस्वरूप, उच्च-मूल्य बैंक धोखाधड़ी मामले में एक घोषित अपराधी नसरीन ताज का पता लगाया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई से बचने के लिए आरोपी, 'नसरीन' से 'सलमा' बन गई। सीबीआई ने भी आरोपी को तलाश कर उसे गिरफ्तार करने का प्रयास जारी रखा। 12.63 करोड़ रुपये की बैंक जालसाजी के मामले में 6 साल बाद सीबीआई को सफलता भी मिली। नाम और पता बदलकर रह रही आरोपी नसरीन ताज को बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया गया।
बता दें कि सीबीआई ने 15 अप्रैल 2009 को सिंडिकेट बैंक, मंड्या शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, असदुल्ला खान और 8 अन्य लोगों सहित आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करके सिंडिकेट बैंक को धोखा देने के लिए मामला दर्ज किया था। इस मामले में, आरोपियों ने सिंडिकेट बैंक को ₹12.63 करोड़ की धोखाधड़ी करने की साजिश रची थी। नसरीन ताज के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं था। हालांकि, उन्होंने अपने पति असदुल्लाह खान और अन्य लोगों के साथ मिलीभगत करके सिंडिकेट बैंक से बैंक के साथ धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया। उन्होंने धोखाधड़ी से सिंडिकेट बैंक से ₹55 लाख के कृषि ऋण के साथ-साथ एक करोड़ बीस लाख रुपये तक की अस्थायी ओवरड्राफ्ट (टीओडी) सुविधा का लाभ उठाया। इन कृषि ऋणों से प्राप्त राशि को उन्होंने कृषि विकास के लिए उपयोग करने के बजाय, जैसा कि स्वीकृति की शर्तों के तहत अनिवार्य था, टीओडी की अदायगी में अवैध रूप से लगा दिया।
इस मामले की जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 12 अक्तूबर 2010 को आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें नसरीन ताज को सिंडिकेट बैंक के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी करने वाले षड्यंत्रकारियों में से एक बताया गया। वह मुकदमे में शामिल होने या समन/वारंट का जवाब देने में विफल रहीं। आरोपी 2019 से लापता थीं। उनके खिलाफ 30 अप्रैल 2019 से कई गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किए गए थे। अंततः, विशेष न्यायालय, बेंगलुरु ने 27 नवंबर 2021 को उनके खिलाफ संपत्ति की उद्घोषणा और कुर्की वारंट जारी करने का आदेश दिया। वर्षों से उनका पता लगाने के निरंतर प्रयासों के बावजूद, फरार आरोपी का पता नहीं चल पाया था। अन्य सह-आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया। उन्हें इस मामले में दोषी/बरी कर दिया गया। फरार आरोपी के खिलाफ मुकदमा लंबित रहा।
आरोपी नसरीन ताज ने जानबूझकर अपने पति, परिवार के सदस्यों और सामाजिक नेटवर्क से संपर्क तोड़ दिया था। वह बार-बार निवास स्थान बदलती रही। जांच एजेंसी से बचने के लिए उसने अपना नाम बदल लिया था। उसने स्थानीय निवासी के साथ-साथ नियोक्ता को भी अपनी असली पहचान के बारे में गुमराह किया था। उसने स्थानीय लोगों के साथ न्यूनतम बातचीत बनाए रखी थी, जिससे उसे ढूंढने के प्रयासों में और ज्यादा बाधा आई।
सीबीआई ने उन्नत तकनीकी उपकरणों और पहचान-ट्रैकिंग डेटाबेस की तैनाती के माध्यम से, फरार आरोपी की वर्तमान पहचान और स्थान का पता लगाने के लिए उसके डिजिटल फुटप्रिंट का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया। व्यापक क्षेत्र जांच और जमीनी पूछताछ के पूरक के रूप में, सीबीआई टीम ने नसरीन ताज को बेंगलुरु में सफलतापूर्वक ढूंढ निकाला।
वह वहां पर सलमा के झूठे नाम से रह रही थी। उसकी पहचान के बाद, नसरीन ताज को 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बेंगलुरु में सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी-संचालित खुफिया प्लेटफार्मों को जमीनी स्तर पर जांच अधिकारियों के सतत और समन्वित प्रयासों के साथ एकीकृत करके, लंबे समय से फरार अपराधियों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की परिचालन क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है।