केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की महिला कांस्टेबल ने दिल्ली के चिकित्सा निदेशालय को खत लिख सेक्स चेंज सर्जरी कराने की इजाजत मांगी है। इस तरह के अनुरोध को नियंत्रित करने या संसाधित करने के लिए कोई लिखित नियम नहीं होने के कारण उसने बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और आईटीबीपी से खत के माध्यम से ऐसे मामलों की जानकारी भी मांगी है। जिन्हें भविष्य में उन्होंने कभी संभाला हो।
सभी अर्धसैनिक बलों को 12 जुलाई को इस बारे में सीआईएसएफ के मेडिकल निर्देशक डॉक्टर शेखर जयसवाल ने लिखा है कि सीआईएसएफ की महिला कांस्टेबल का सेक्स चेंज सर्जरी कराने का निवेदन सीआईसएफ के मुख्यालय को मिल चुका है। उन्होंने खत में सभी बलों को कहा है कि इस निवेदन के लिए मंजूरी दे दें अगर आपके संगठन ने कभी अतीत में ऐसे किसी मामले के लिए मंजूरी दी हो या फिर संचालित किया हो।
बता दें कि ऐसा ही एक मामला सीआईएसएफ में बीते साल भी आया था। जब एक महिला कांस्टेबल ने सेक्स चेंज सर्जरी करवाई थी। वह महिला से पुरुष बनी थी। उसे 7 साल बाद सीआईएसएफ में पुरुष के तौर पर शामिल किया गया। दरअसल उसने बिना मंजूरी लिए ही सेक्स चेंज सर्जरी करवा ली थी। उसे पुरुष कांस्टेबल के तौर पर सीआईएसएफ में शामिल होने के लिए मेडिकल टेस्ट पास करना पड़ा। उसका निवेदन भी तब जाकर पास हुआ जब विभिन्न अर्धसैनिक बलों ने शीरीरिक परिक्षण मानकों को परखने के बाद निवेदन को मंजूरी दी।
इस पर एक सीआईएसएफ अधिकारी का कहना है कि यह एक मुश्किल प्रक्रिया है। महिला और पुरुष कांस्टेबल के चयन के मापदंड में अंतर होता है। अगर किसी को महिला कांस्टेबल के पद पर नियुक्त किया जाता है और यदि वह किसी बल के अंतर्गत अपनी ड्यूटी भी वहन कर ले तो वह सेक्स चेंज सर्जरी के बाद खुद ब खुद पुरुष कांस्टेबल की ड्यूटी नहीं कर सकती। इसी साल मई में महाराष्ट्र के बीड में भी एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने सेक्स चेंज सर्जरी कराने के लिए छुट्टियां मांगी थी जिसे मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद उसने बॉम्बे हाई कोर्ट और मुख्यमंत्री से देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया। जिसके बाद उसे मंजूरी मिल गई।