अपनी पत्नी को जारी खुला प्रमाण पत्र रद्द कराने के लिए कोर्ट पहुंचे एक व्यक्ति की याचिका पर जस्टिस सी सरवनन ने शरीयत परिषद, तमिलनाडु तौहीद जमात की ओर से 2017 में जारी किए गए प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया।
अपनी पत्नी को जारी खुला प्रमाण पत्र रद्द कराने के लिए कोर्ट पहुंचे एक व्यक्ति की याचिका पर जस्टिस सी सरवनन ने शरीयत परिषद, तमिलनाडु तौहीद जमात की ओर से 2017 में जारी किए गए प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया। इस मौके पर मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि एक मुस्लिम महिला को शरीयत परिषद जैसे किसी निजी निकाय के बजाय पारिवारिक न्यायालय में जाकर ‘खुला’ के माध्यम से अपने विवाह को भंग करने का अधिकार है।
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न्यायमूर्ति सी सरवनन ने माना कि निजी निकायों द्वारा ऐसे प्रमाणपत्र अमान्य हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु के तौहीद जमात की शरीयत परिषद से 2017 में उसकी पत्नी द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्र को रद्द करने के लिए 2019 में एक व्यक्ति अब्दुल द्वारा याचिका दायर की गई थी।
2013 में शादी करने वाले इस जोड़े का एक बच्चा है। अब्दुल की पत्नी ने 2016 में उसे छोड़ दिया था। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में तर्क दिया था कि 1975 के तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत परिषद के पास इस तरह के प्रमाण पत्र जारी करने का कोई अधिकार नहीं था।