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Wolf: विलुप्ति की कगार पर भेड़िया; जंगलों में करीब तीन हजार ही बचे, महाराष्ट्र में 2007 से 2023 के बीच 41% घटे

Mon, 13 Oct 2025 07:08 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य में 2007 और 2023 के बीच भेड़ियों की आबादी में 41% से अधिक की गिरावट आई है। यानी हर साल 3.1% की दर से इनकी आबादी कम हो रही है।
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भेड़िया। - फोटो : Freepik
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विस्तार
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दुनिया की सबसे प्राचीन और दुर्लभ भेड़िया प्रजाति में शामिल कैनिस ल्यूपस पैलिप्स विलुप्त होने के कगार पर है। इस भारतीय भेड़िए की संख्या जंगलों में तीन हजार के करीब ही बची है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे आधिकारिक तौर संकटग्रस्त मानकर अपनी लाल सूची में शामिल कर लिया है।

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आईयूसीएन ने 10 अक्तूबर को भारतीय भेड़िये को लाल सूची में डालने का फैसला भारतीय शोधकर्ताओं के अध्ययन के आधार पर लिया। इसके तहत भारत और पाकिस्तान में ऐसे 10 हजार स्थानों पर भारतीय भेड़ियों की संख्या के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई, जहां पिछले दो दशकों में इनकी आबादी होने का पता लगा था। शोध में पाया गया कि जंगलों में वयस्क भारतीय भेड़ियों की आबादी 2,877 से 3,310 के बीच ही बची है। शोधकर्ताओं ने मौजूदा आबादी का अनुमान लगाया और महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान को प्रमुख गढ़ों के तौर पर पहचाना, जहां कुल मिलाकर भारत के लगभग आधे भेड़ियों होने का अनुमान है।

महाराष्ट्र के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य में 2007 और 2023 के बीच भेड़ियों की आबादी में 41% से अधिक की गिरावट आई है। यानी हर साल 3.1% की दर से इनकी आबादी कम हो रही है। अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के डॉ. देशभर के कई वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने डब्ल्यूआईआई के पूर्व डीन डॉ. यादवेंद्रदेव विक्रमसिंह झाला के साथ मिलकर काम किया। राइस विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ. लॉरेन हेनेली भी इसमें सह-सहयोगी थीं।
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इन्सानों के साथ संघर्ष और घटते आवास प्रमुख वजह
आईयूसीएन के आकलन के मुताबिक, आवास घटने, इंसानों के साथ संघर्ष, बीमारी और जंगली कुत्तों के साथ संकरण के कारण पिछली तीन पीढ़ियों में भेड़ियों की संख्या में गिरावट आई है। डॉ. खान कहते हैं कि आवास का नुकसान और संकरण सबसे बड़े खतरे हैं। कुत्ते-भेड़िया संकरण वास्तविक भेड़ियों की आबादी को सीधे प्रभावित कर रहा है, और हम आनुवंशिक रूप से शुद्ध भेड़ियों में लगातार गिरावट देख रहे हैं।

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