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राष्ट्रवाद के बिना मानव जीवन व्यर्थ, इसके बगैर विश्वगुरु नहीं बन सकता भारतः अनिल गुप्ता  

Sun, 18 Aug 2019 09:04 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
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आज के समय में कुछ लोग राष्ट्रवाद के विरोध में बोलना फैशन समझने लगे हैं, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि राष्ट्रवाद के बिना हमारा अस्तित्व पशुओं से अधिक नहीं है। राष्ट्रवाद के बिना मानव जीवन व्यर्थ है और अगर देश को विश्वगुरु बनाना है तो युवाओं में राष्ट्रवाद की मजबूत ज्योति जलानी पड़ेगी। तभी वे राष्ट्र के लिए कुछ करने को आतुर होंगे और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। यह कहना है हिंदी संस्थान के अध्यक्ष अनिल गुप्ता का। 

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राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की 133वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अनिल गुप्ता ने कहा कि किसी भी देश के युवाओं को ऊर्जा से लबरेज करने के लिए एक प्रेरक कारण की आवश्यकता होती है। और दुनिया जानती है कि राष्ट्रवाद से बड़ा प्रेरक कारण और दूसरा कुछ भी नहीं हो सकता। हमारे स्वतंत्रता संग्राम की सफलता का कारण हमारे युवाओं का राष्ट्रवाद से भर जाना और उसके बाद अंग्रेजी सरकार के खिलाफ उतर जाना था। इसलिए अगर भारत को दुनिया को रास्ता दिखाना है तो इसके युवाओं को राष्ट्रवाद से भरना पड़ेगा।

मैथिली शरण गुप्त पर पुस्तक लिख चुके लेखक विराग गुप्ता ने कहा कि उनकी कविताएं देश की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में बहुत महत्त्वपूर्ण साबित हुई थीं, इसीलिए कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें राष्ट्रकवि की संज्ञा देकर सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भारत के सामने जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान भी मैथिलीशरण गुप्त के राष्ट्रवाद में आज भी देखा जा सकता है। 
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विराग गुप्ता ने कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा आर्थिक उपनिवेश बन जाने का है। लेकिन इस समस्या का सामना भी केवल मैथिली शरण गुप्त के राष्ट्रवाद के जरिये ही किया जा सकता है। जब तक हमारे देश के युवाओं में स्वदेशी की ताकत की समझ नहीं होगी, भारत आर्थिक गुलामी के दुश्चक्र में फंसता चला जाएगा। इसलिए युवाओं को राष्ट्रवाद और स्वदेशी की बेहतर जानकारी देनी चाहिए। 

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