अपने हुनर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचाने के लिए मवाना निवासी अफजाल कार से लखनऊ की दूरी तय करेंगे। गांव अस्सा निवासी युवक के दो साल की उम्र में ही दोनों पैर बेकार हो गए थे। अब वह हाथों से ही ब्रेक प्रयोग करते हैं।
अफजाल ने बताया दो साल की उम्र में उन्हें तेज बुखार आया और पैर बेकार हो गए। तब से व्हीलचेयर पर हैं। वह कहानियां लिखते हैं। बकौल अफजाल मैंने तीन-चार फिल्मी कहानियां लिखी हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी लिखी कहानियां उन्हें दूंगा, ताकि वो किसी फिल्म निर्माता को ये कहानियां देकर मेरी मदद कराएं। वह लेखन के साथ गायन और तैराकी में भी माहिर हैं। मुकेश, सोनू निगम के गीत खूबसूरती से गाते हैं। उनका दावा है कि गंगनहर जैसे तेज वेग पानी में दिव्यांग होने के बाद भी बखूबी तैरकर पार कर सकते हैं।
ड्राइविंग के लिए डिजायन की कार
अफजाल ने अपने हुनर के दम पर दिव्यांगता को पीछे छोड़ दिया। स्वयं कार चलाकर दिल्ली तक घूम आए हैं। वे दावा करते हैं कि 60 से 80 किमी प्रति घंटा की दर से वो कार चला सकते हैं। अपनी कार खुद डिजायन की है। ब्रेक, क्लच, गियर सभी को वो हाथों से हैंडल करते हैं। इनमें उन्होंने लोहे की छड़ लगवाई हैं। इनकी मदद से हाथों से स्टियरिंग संभालते हुए वे ब्रेक, क्लच और गियर सभी बखूबी संभालते हैं।