जीएसटी परिषद की 32वीं बैठक में कंपोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ाने के साथ रिटर्न दाखिले की प्रक्रिया सालाना किए जाने से कारोबारियों को बड़ी सहूलियत होगी। इस फैसले से छोटे कारोबारियों का रिटर्न दाखिल करने पर होने वाला खर्च 1 अप्रैल, 2019 से काफी घट जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि जीएसटी परिषद के कंपोजिशन स्कीम का दायरा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ करने से लाखों कारोबारियों को इसका लाभ मिलेगा। उन्हें अपना रिटर्न अब तिमाही के बजाए सालाना आधार पर दाखिल करना होगा।
इससे कई तरह की कागजी परेशानियों से छुटकारा मिलने के साथ उनका खर्च भी कम हो जाएगा। हालांकि, ऐसे कारोबारियों को जीएसटी तिमाही आधार पर ही भरना होगा। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन ओपी प्रह्लादका का कहना है कि यह फैसला एमएसएमई क्षेत्र के लिए बेहद कारगर साबित होगा। तिमाही रिटर्न दाखिले से छुटकारा मिलने के कारण अब छोटे कारोबारियों का समय और ऊर्जा बचेगी जिसका इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में किया जा सकेगा। साथ ही इससे कारोबार सुगमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी और अन्य लोग भी कारोबार की ओर आकर्षित होंगे जिससे आने वाले समय में नई नौकरियों का सृजन होगा।
कई और समस्याओं का भी निदान जरूरी
रिफंड में देरी : कंपोजिशन स्कीम से बाहर रहने वाले कारोबारियों को अभी हर माह रिटर्न दाखिल करना होता है लेकिन उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में मिलने वाले रिफंड में काफी देर होती है। इससे उनके पास अगले ऑर्डर के लिए नकदी का संकट हो जाता है। अनुमान के मुताबिक 70-80 फीसदी कारोबारियों को समय पर रिफंड नहीं मिल पाता है।
रिटर्न फॉर्म की जटिलता : कारोबारियों की मांग है कि जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का फॉर्म सरल बनाया जाए और इसे मौजूदा 4-5 पन्नों से घटाकर एक पन्ने तक सीमित किया जाए। हालांकि, सरकार ने जीएसटी रिटर्न का नया फॉर्म इस साल जुलाई से उपलब्ध करने का आश्वासन दिया है।
अंतरराज्यीय आपूर्ति की छूट : विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी पंजीकरण का दायरा बढ़ाने के साथ ही सरकार को इस दायरे में आने वाले कारोबारियों को भी अंतरराज्यीय आपूर्ति की छूट दी जानी चाहिए। तभी निल टैक्स से बाहर करने की कवायद सफल होगी। अभी एक रुपये के अंतरराज्यीय आपूर्ति के लिए भी जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य है।
पुराने उत्पादों पर ठोस निर्णय : जीएसटी लागू होने से पहले बने उत्पादों पर फिलहाल कोई ठोस और स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। सरकार ने पहले इन उत्पादों को खपाने की समय-सीमा 31 दिसंबर, 2018 रखी थी जिसे इस साल के मध्य तक बढ़ा दिया गया है। देश में अब भी करोड़ों के प्री-जीएसटी उत्पाद शेष हैं जिस पर स्पष्ट नीति जरूरी है।
ऑटो पार्ट्स, अल्यूमीनियम पर ज्यादा दर : अभी ऑटो पार्ट्स और दोपहिया वाहनों पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है जिसे घटाए जाने की मांग है। इसके अलावा अल्युमीनियम बर्तनों पर 12 फीसदी जीएसटी है जिसका ज्यादातर इस्तेमाल गरीब तबका करता है। इस पर जीएसटी दर 5 फीसदी करने की मांग है।
जीएसटी पंजीकरण से छूट और कंपोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, क्योंकि आर्थिक विकास में एमएसएमई क्षेत्र का बड़ा योगदान है।
-निरंजन हीरानंदानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एसोचैम