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Indus Water Treaty: सिंध के पानी पर अब सिर्फ भारत का अधिकार, पाकिस्तान के लिए यह कितना बड़ा झटका, अब आगे क्या?

Fri, 25 Apr 2025 05:12 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। इसमें भी वह सिंधु नदी बेसिन के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। ऐसे में भारत द्वारा सिंध जल संधि को स्थगित करने से पाकिस्तान को कई मोर्चों पर व्यापक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जहां एक ओर पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर होगा प्रभावित होगा, वहीं उसके कई शहरों में पीने के पानी का भी संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, समझौते के निलंबन से पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर कूटनीतिक विश्वसनीयता और कमजोर होगी। वैश्विक समुदाय इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम के रूप में देखेगा और पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव बढ़ सकता है।
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सिंधु जल संधि - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया है वह पाकिस्तान की आर्थिक कमर तोड़ सकता है। दरअसल समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिलेगा बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वह पाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे। भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा।

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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। इसमें भी वह सिंधु नदी बेसिन के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत और पाकिस्तान के बीच जल समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी और उसकी पश्चिमी सहायक नदियों (झेलम और चिनाब) का पानी आवंटित किया गया है। भारत यदि इन नदियों के प्रवाह को मोड़ देता है तो पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आ जाएगा। सिंचाई में कमी से गेहूं, चावल, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण हैं। ब्यूरो

सिंधु जल समझौता
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया। समझौते के तहत भारत को लगभग 30 प्रतिशत और पाकिस्तान को 70 प्रतिशन पानी का हक मिला। इस समझौते में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का पानी भारत को पाकिस्तान में जाने देना होगा।  
 

संधि स्थगित होने के बाद अब पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर होगा प्रभावित
पाकिस्तान की आबादी के करीब 237 मिलियन लोग इस प्रणाली के अंतर्गत मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। इसके अलावा पाकिस्तान ने इन नदियों पर कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बनाए हैं। पाकिस्तान की जीडीपी में कृषि का एक महत्वपूर्ण योगदान है। सिंधु जल संधि के स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। सिंचाई के लिए पानी न मिल पाने की वजह से फसलें तैयार नहीं हो पाएंगी, जिसके चलते पाकिस्तान में भुखमरी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। 

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पाकिस्तान में खड़ा हो जाएगा अन्न, जल और उर्जा का संकट  
सिंधु जल समझौते पर रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। पाकिस्तान की 80 फीसदी खेती योग्य भूमि (16 मिलियन हेक्टेयर) सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। पानी रोके जाने के बाद अन्न संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची, लाहौर, मुल्तान निर्भर हैं। पाकिस्तान के तरबेला और मंगला जैसे पॉवर प्रोजेक्ट इस नदी पर निर्भर करते हैं, अगर पानी रोका जाता है, तो पाकिस्तान में  ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा। 
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कूटनीतिक विश्वसनीयता को नुकसान
समझौते के निलंबन से पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर कूटनीतिक विश्वसनीयता और कमजोर होगी। वैश्विक समुदाय इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम के रूप में देखेगा और पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव बढ़ सकता है। ऐसे में, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना और भी मुश्किल हो जाएगा। 

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