नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वान वील के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि व्यापार, रक्षा, शिपिंग, जल, कृषि, स्वास्थ्य और संस्कृति के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, प्रतिभा आवागमन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग पर उपयोगी चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत और नीदरलैंड्स के बीच उभर रहे नए सहयोग क्षेत्रों के चलते द्विपक्षीय रिश्तों की महत्वाकांक्षा को और ऊंचा उठाने की पूरी गुंजाइश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, साइबर स्पेस और लाइफ साइंसेज जैसे क्षेत्रों में भारत, नीदरलैंड्स के साथ और नजदीकी से काम करना चाहता है।
नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता
नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वान वील के साथ द्विपक्षीय वार्ता से पहले अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत, यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है और इस दिशा में नीदरलैंड्स के समर्थन को वह बेहद अहम मानता है। जयशंकर ने कहा कि भारत-नीदरलैंड्स के रिश्ते न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि यूरोपीय संघ में नीदरलैंड्स की भूमिका के कारण भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में कई अहम समझौते हुए हैं, जिनसे दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा और विस्तार मिला है।
विज्ञापन
'साझेदारी को नई ऊंचाई देने का अवसर'
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी है, वहीं कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शिपिंग में सहयोग पहले से ही मजबूत है। अब सेमीकंडक्टर जैसे नए और अहम क्षेत्रों के जुड़ने से इस साझेदारी को नई ऊंचाई देने का अवसर है। विदेश मंत्री ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी डच विदेश मंत्री के विचार जानने की इच्छा जताई।
जी-20 शिखर सम्मेलन में मिले थे दोनों देशों के प्रधानमंत्री
बता दें कि इससे पहले दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने तब कहा था कि जल संसाधन, नवाचार, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है और भविष्य में व्यापार व निवेश संबंधों को और गहरा किया जाएगा। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हाल में डच विदेश मंत्री से मुलाकात कर सुरक्षा और रक्षा सहयोग, खासकर रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी। इससे साफ है कि भारत और नीदरलैंड्स के रिश्ते पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए आयाम गढ़ रहे हैं।