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Election: बिहार में दूसरे चरण के चुनाव के साथ 10 राज्यों की 54 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव, समझिए पूरा गणित

Mon, 02 Nov 2020 08:12 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
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मंगलवार को बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान होना है। इसके साथ ही दस अन्य राज्यों की 54 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए भी मतदान होंगे। ये चुनाव केवल खाली सीटों को भरने का काम ही नहीं करेंगे बल्कि कोरोना काल में जनता की नजर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार का रिपोर्ट कार्ड भी तय करेंगे। ऐसे में ये उपचुनाव देश की राजनीति के लिए खासे अहम साबित हो सकते हैं। 

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बता दें कि राज्यों की विधानसभाओं में फिलहाल 63 सीटें खाली हैं। इनमें से कुल 56 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 54 सीटों पर कल मतदान होगा। इन उपचुनावों के नतीजे 10 नवंबर को घोषित कर दिए जाएंगे। मणिपुर की दो विधानसभा सीटों पर सात नवंबर को मतदान होगा। वहीं, केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां की सात सीटों पर उपचुनाव टाल दिए गए हैं।

कहां कितनी सीटों पर हो रहे हैं उपचुनाव

कल होने वाले उपचुनाव में सबसे ज्यादा 28 सीटों पर मध्यप्रदेश में मतदान होगा। इसके साथ ही गुजरात में आठ, उत्तर प्रदेश में सात, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और नागालैंड में दो-दो और तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा में एक-एक विधानसभा सीट पर मतदान होगा। 

आगे पढ़िए, किस राज्य का उपचुनाव क्या महत्व डालेगा।

मध्यप्रदेश में उपचुनाव का गणित

मध्यप्रदेश में जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 25 सीटें वही हैं जहां कांग्रेस के विधायक ने इस्तीफा देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी और शिवराज सिंह चौहान दोबारा मुख्यमंत्री चुने गए थे। बाकी तीन सीटें विधायकों के निधन के बाद खाली हो गई थीं।  

बता दें कि प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में भाजपा के 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 88, चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा का विधायक है। भाजपा को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र नौ सीटों पर जीत दर्ज करने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को इसके लिए सभी 28 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी।

गुजरात की आठ सीटों पर भाजपा की परीक्षा

जून में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे की वजह से गुजरात की आठ सीटों पर उपचुनाव जरूरी हो गए थे। गुजरात भाजपा के प्रमुख सीआर पाटिल ने 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए 200 में से 182 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में यह उपचुनाव पाटिल के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

हालांकि, गुजरात में उपचुनाव का सरकार पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। 182 सीटों वाले सदन में भाजपा के पास 103 सीटें हैं। वहीं, कांग्रेस के पास फिलहाल महज 65 सीटें हैं। हालांकि, इस उपचुनाव का परिणाम यह बताएगा कि मतदाता का रुख क्या है। कांग्रेस से भाजपा में आए आठ नेताओं में से पांच को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के लिए चुनौती

साल 2017 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में एकतरफा जीत दर्ज की थी। प्रदेश की जिन सात सीटों पर चुनाव हो रहा है उनमें छह पर पार्टी ने दशकों बाद जीत हासिल की थी। एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। माना जा रहा है कि इन उपचुनावों में अपराध, महिला सुरक्षा और जाति आधारित संघर्षों के चलते योगी आदित्यनाथ सरकार को खासी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। 

कर्नाटक, झारखंड, नगालैंड और मणिपुर में दो-दो सीटों पर चुनाव 

इन चार राज्यों की दो-दो विधानसभा सीटों पर कल होने वाले उपचुनाव को महज औपरचारिकता माना जा रहा है। कर्नाटक में जनता दल-सेक्युलर के उम्मीदवार बी सत्यनारायण के निधन के बाद सिरा सीट खाली हो गई थी। कांग्रेस विधायक मुनिरत्न नायडू के भाजपा में चले जाने के बाद जुलाई 2019 में आरआर नगर सीट खाली हुई थी। ओडिशा में, तीर्थोल और बालासोर सदर सीट पर चुनाव हो रहे हैं। 

इधर झारखंड में दुमका और बेरमो विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दुमका सीट छोड़ने के बाद यह खाली हो गई थी और बेरमो से के कांग्रेस विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह का मई में निधन हो गया, जिसके बाद इन दोनों सीटों पर चुनाव कराना जरूरी हो गया था। नागालैंड के कोहिमा में दक्षिणी अंगामी-आई सीट और किफिर जिले की पुंग्रो-किफायर सीट पर उपचुनाव होने हैं। 
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तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में एक-एक सीट पर चुनाव

तेलंगाना में डबका विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना है। यहां सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के विधायक सोलीपराम रामलिंग रेड्डी के आकस्मिक निधन के बाद यह सीट खाली हो गई। छत्तीसगढ़ में अजित जोगी के निधन से खाली हुई मरवाही सीट पर दो दशक से परिवार का ही कब्जा रहा है। इसके अलावा हरियाणा में, सोनीपत में बड़ौदा विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन के कारण रिक्त होने के बाद उपचुनाव कराना जरूरी हो गया है। 
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