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Karnataka: 'विप्रो परिसर सार्वजनिक आवागमन के लिए नहीं', अजीज प्रेमजी ने ठुकराया सीएम सिद्धारमैया का अनुरोध

Thu, 25 Sep 2025 06:21 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 19 सितंबर को अजीज प्रेमजी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि बंगलूरू आउटर रिंग रोड पर बढ़ते जाम को कम करने की पहल के तहत कंपनी अपने कैंपस में वाहनों की सीमित आवाजाही की अनुमति दे। इसके जवाब में विप्रो चेयरमैन ने सीएम को यातायात से निपटने के उपाय सुझाए। 
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विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया - फोटो : ANI
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विस्तार
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विप्रो के संस्थापक और चेयरमैन अजीज प्रेमजी ने सीएम सिद्धारमैया की ओर से किए गए कंपनी के सरजापुर परिसर से सीमित वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने के अनुरोध को ठुकरा दिया है। कंपनी के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने कहा कि यह कंपनी के स्वामित्व वाली विशेष निजी संपत्ति है, यह सार्वजनिक आवागमन के लिए नहीं है। परिसर से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने से महत्वपूर्ण कानूनी, प्रशासनिक और वैधानिक चुनौतियां पैदा होंगी।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 19 सितंबर को अजीज प्रेमजी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि बंगलूरू आउटर रिंग रोड पर बढ़ते जाम को कम करने की पहल के तहत कंपनी अपने कैंपस में वाहनों की सीमित आवाजाही की अनुमति दे। इस कदम से ट्रैफिक का दबाव घटेगा और आईटी कॉरिडोर में सफर करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।

सीएम सिद्धारमैया के पत्र के जवाब में अजीज प्रेमजी ने लिखा कि हम बंगलूरू में ट्रैफिक जाम जैसे गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए सीएम की सराहना करते हैं। लेकिन हमारे सरजापुर परिसर से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने के सुझाव पर हमारा रुख अलग है। इससे कंपनी के लिए गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वैधानिक चुनौतियों की आशंका है। क्योंकि यह कंपनी के स्वामित्व वाली एक विशेष निजी संपत्ति है, जो सार्वजनिक आवागमन के लिए नहीं है।
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उन्होंने कहा कि हमारा सरजापुर परिसर एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) है जो वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है। हमारी संविदात्मक शर्तों में शासन और अनुपालन के लिए कड़े, गैर-परक्राम्य पहुंच नियंत्रण मानदंड अनिवार्य हैं। निजी संपत्ति के माध्यम से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही एक स्थायी, दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रभावी नहीं होगी।

अजीज प्रेमजी ने कहा कि फिर भी विप्रो, बंगलूरू की चुनौतियों के लिए एक स्थायी समाधान खोजने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि सहयोगात्मक, डाटा-संचालित दृष्टिकोण से शहर के लिए सबसे प्रभावशाली परिणाम प्राप्त होंगे। प्रमुख आर्थिक केंद्र बनने के लिए ट्रैफिक की स्थिति, विशेष रूप से आउटर रिंग रोड, के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय किए जाने की आवश्यकता है।
 
वैज्ञानिक और व्यापक सर्वे कराने की जरूरत, विप्रो करेगी सहयोग
विप्रो चेयरमैन ने कहा कि समस्या की जटिलता से पता चलता है कि इसका कोई एकल समाधान या कोई निश्चित समाधान होना सम्भव नहीं है। जाम के समाधान का सबसे प्रभावी रास्ता शहरी परिवहन प्रबंधन में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता वाली किसी संस्था के नेतृत्व में एक व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे प्रभावी समाधानों का एक समग्र रोडमैप विकसित होगा। जिसे अल्पावधि, मध्यमावधि और दीर्घावधि में क्रियान्वित किया जा सके। विप्रो इस प्रक्रिया में शामिल होगी। साथ ही इस विशेषज्ञ अध्ययन की लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वहन करेगी।
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सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI

सीएम सिद्धारमैया ने क्या कहा था?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सुझाव दिया था कि अगर तय शर्तों और सुरक्षा प्रावधानों के तहत विप्रो अपने कैंपस से सीमित वाहनों की आवाजाही की अनुमति देता है, तो ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कदम से पीक ऑवर्स में ORR पर जाम लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। सिद्धारमैया ने लिखा कि इससे न केवल यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा बल्कि बंगलूरू को अधिक कुशल और रहने योग्य शहर बनाने की दिशा में भी मदद होगी। उन्होंने विप्रो से आग्रह किया है कि उनकी टीम जल्द से जल्द सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर इस पर ठोस योजना तैयार करे।

ट्रैफिक समस्या से जूझ रहा बंगलूरू
बंगलूरू का आउटर रिंग रोड, जहां कई बड़ी तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप कंपनियों के दफ्तर हैं, लंबे समय से यातायात, खराब सड़क गुणवत्ता और समय पर रखरखाव की कमी से जूझ रहा है। हाल ही में लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप ब्लैकबक ने शहर के आउटर रिंग रोड क्षेत्र से अपना दफ्तर हटाने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि बिगड़ते सड़क हालात और बढ़ते आवागमन समय के कारण कर्मचारियों के लिए वहां काम करना मुश्किल हो गया है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ राजेश याबाजी ने कहा कि सड़कें गड्डों और धूल से भरी हैं, और उन्हें ठीक कराने की कोई मंशा नहीं है। अगले 5 वर्षों में इसमें कोई बदलाव नहीं दिखेगा।

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