पीएम मोदी ने अपने अनुभव को याद किया। बताया कि राज्यसभा में उन्हें कितना सुंदर अनुभव देखने को मिला। उन्होंने राज्यसभा से पारित तीन तलाक, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, जीएसटी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति का जैसे जटिल विधेयक पारित किए जाने का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्यसभा में कितना 'स्मूथ' तरीके से कामकाज हुआ। प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्यसभा का 250वां सत्र, पहले सत्र से केवल बीता हुआ समय नहीं विचार एक विचार यात्रा रही। इसमें उन्होंने भारत की विकास यात्रा का प्रतिबिंब देखा। राज्यसभा को सेकेंड्री सदन नहीं, बल्कि सपोर्टिव सदन बताया।
प्रधानमंत्री के तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बोलने खड़े हुए। मनमोहन सिंह ने लोकसभा में विधेयक को संसद की स्थाई समिति के पास चर्चा के लिए भेजे जाने से परहेज किए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा में 15वीं और 14वीं की तुलना में क्रमश: 60 और 71 फीसदी बिल संसदीय समितियों के पास नहीं भेजे गए। 16वीं लोकसभा में पेश किए गए विधेयकों में से केवल 25 फीसदी को ही समितियों के पास भेजा गया। उन्होंने मनी बिल के रूप में लाए गए बिलों को शक्ति का दुरुपयोग बताया और इस तरह के प्रयास से बचने की सलाह दी।